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Nobel Prize For Economics : भारत के अभिजीत बनर्जी को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार

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भारतीय मूल के अभिजीत बनर्जी (Abhijeet Banerjee) को अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उनकी पत्नी  एस्थर डुफलो (Esther Duflo) और माइकल क्रेमर (Michael Kremer ) के साथ उन्हें मिला है (Nobel Prize For Economics)। तीनों को वैश्विक गरीबी को कम करने के लिए किए गए अपने कामों के लिए नोबेल से सम्मानित किया गया। अभिजीत बनर्जी ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है।

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यह  पुरस्कार ‘बैंक ऑफ स्वीडन प्राइज इन इकोनॉमिक साइंसेज इन मेमोरी ऑफ अल्फ्रेड नोबेल (Nobel Prize For Economics) में दिया जाता है। एक बयान में नोबेल समिति ने इस बारे में कहा कि इस साल के पुरस्कार विजेताओं द्वारा किए गए शोध से वैश्विक गरीबी से लड़ने की हमारी क्षमता में काफी सुधार हुआ है। केवल दो दशकों में, उनके नए प्रयोग-आधारित दृष्टिकोण ने विकास अर्थशास्त्र को बदल दिया है, जो अब अनुसंधान का एक समृद्ध क्षेत्र है। वे फिलहाल मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी में इकनॉमिक्स के प्रफेसर हैं। वह अब्दुल लतीफ जमील पॉवर्टी ऐक्शन लैब के को-फाउंडर हैं।

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JNU में पढ़ाई

अभिजीत बनर्जी ने कलकत्ता विश्वविद्यालय (University of Calcutta) , जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (Jawaharlal Nehru University) और हार्वर्ड विश्वविद्यालय (Harvard University) में शिक्षा प्राप्त की। उन्होने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से 1988 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होने 2003 में डफ्लो और सेंथिल मुलैनाथन के साथ, अब्दुल लतीफ जमील गरीबी एक्शन लैब (J-PAL) की स्थापना की, और वह लैब के निदेशकों में से एक रहे। अब उन्होने अमेरिका की नागरिकता ले ली है। इसके पहले इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद को शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया। यह पुरस्कार उनके देश के चिर शत्रु इरिट्रिया के साथ संघर्ष को सुलझाने के लिए दिया गया। नोबेल पुरस्कार जूरी ने बताया अबी को शांति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करने के प्रयासों के लिए और विशेष रूप से पड़ोसी इरिट्रिया के साथ सीमा संघर्ष को सुलझाने के निर्णायक पहल के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

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    – Ranjita Pathare

 

 

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