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APJ Abdul Kalam Jayanti : मिसाइलमैन कलाम जी की 88वीं जयंती पर सादर नमन

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भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक,शिक्षक और मिसाइलमैन के नाम से प्रसिद्ध एपीजे अब्दुल(APJ abdul kalam) कलाम जी की आज 88वीं जयंती है (APJ Abdul Kalam Jayanti)। जिसको दुनियाभर में विश्व छात्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। अब्दुल कलाम छात्रों के मध्य खासा लोकप्रिय थे उन्हें अक्सर बच्चो के साथ ही देखा जाता था। कभी किसी शिक्षण संस्थान को सम्बोधित करते  हुए तो कभी, छात्रों के किसी कार्यक्रम में, अब्दुल कलाम जी ने शिक्षा को नए भारत का आधार बताया था।

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अब्दुल कलाम जी का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को धनुषकोडी गाँव (रामेश्वरम, तमिलनाडु) में एक मध्यमवर्ग मुस्लिम परिवार में इनका जन्म हुआ। इनके पिता जैनुलाब्दीन न तो ज़्यादा पढ़े-लिखे थे, न ही पैसे वाले थे।इनके पिता मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते थे। अब्दुल कलाम संयुक्त परिवार में रहते थे। परिवार की सदस्य संख्या का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि यह स्वयं पाँच भाई एवं पाँच बहन थे और घर में तीन परिवार रहा करते थे। अब्दुल कलाम के जीवन पर इनके पिता का बहुत प्रभाव रहा। वे भले ही पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन उनकी लगन और उनके दिए संस्कार अब्दुल कलाम के बहुत काम आए। पाँच वर्ष की अवस्था में रामेश्वरम की पंचायत के प्राथमिक विद्यालय में उनका दीक्षा-संस्कार हुआ था।

डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam Jayanti) छात्रों के लिए आदर्श थे। उनका जीवन छात्रों के लिए प्रेरणा था कि कैसे एक वंचित और गरीब परिवार का लड़का कुछ ऐसा कर सकता है जिस पर देश को नाज हो। डॉ.कलाम की उपलब्धियों को देखते हुए साल 2010 में संयुक्त राष्ट्र ने उनके जन्मदिन यानी 15 अक्टूबर को विश्व छात्र दिवस के तौर पर मनाने का फैसला किया। उन्होंने अपने भाषणों, लेखनी और किताबों से हजारों छात्रों को प्रोत्साहित किया।

उनके द्वारा 2012 में स्थापित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam Jayanti) सेंटर इस दिशा में अनुकरणीय कार्य कर रहा है। कलाम सेंटर के नाम से ख्यात इस संस्था के सह-संस्थापक और सीईओ सृजन पाल सिंह इन प्रयासों का मर्म समझाते हुए उम्मीद जताते हैं कि कलाम सर का सपना जल्द पूरा होगा।

सृजन कहते हैं, ‘शिक्षा का महत्व डॉ. कलाम भलीभांति समझते थे। लिहाजा, जीवनभर वह इस ध्येय की पूर्ति में रत रहे। आइआइएम शिलांग में छात्रों को संबोधित करते हुए ही उन्होंने अंतिम सांस ली थी। उस क्षण भी मैं उनके साथ था। नई दिल्ली में जब उन्होंने कलाम सेंटर की नींव रखी थी, तब मुझे उनके इस महान उद्देश्य में बतौर सह-संस्थापक जुड़ने का सौभाग्य मिला। 2009 में आइआइएम, अहमदाबाद से प्रबंधन में गोल्ड मेडल प्राप्त करने के बाद मैं डॉ. कलाम का स्थायी सहायक बन गया था।

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अपने पूरे वैज्ञानिक और राजनीतिक जीवन में अब्दुल कलाम जी (APJ Abdul Kalam Birthday Anniversary) ने खुद को शिक्षक समझा। जब वह छात्रों को संबोधित करते थे तो उनको काफी संतुष्टि मिलती थी। छात्रों और पढ़ाई के प्रति उनका लगाव उनकी जिंदगी की एक घटना से समझा जा सकता है। एक बार उन्होंने शिक्षक बनने के लिए भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का पद तक त्याग दिया था। यह पद कैबिनेट स्तर का पद था।

एपीजे अब्दुल कलाम जी (APJ Abdul Kalam Birthday Anniversary) को भारत रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उन्हें साल 1997 में मिला था। इसके अलावा उन्हें पद्म विभूषण, रामानुजन पुरस्कार, मानद डॉक्टेरेट, डॉक्टर ऑफ साइंस आदि जैसे कई सम्मान मिल चुके थे।

एपीजे अब्दुल कलाम के प्रेरणादायक विचार:
-अगर आप सूरज की तरह चमकना चाहते हैं तो पहले आपको सूरज की तरह तपना होगा।
-आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत, असफलता नामक बीमारी को मारने के लिए सबसे बढि़या दवाई है।
-इंतजार करने वालों को सिर्फ उतना ही मिलता है जितना कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं।
-सपने वो नहीं हैं जो आप नींद में देखते हैं, सपने वो हैं जो आपको नींद ही नहीं आने दें। (‘सपने वो नहीं होते जो आप सोने के बाद देखते हैं, सपने वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते)
-जीवन में फेल होते हैं तो कभी हार न मानें क्योंकि फेल (FAIL) मतलब फर्स्ट अटैम्प्ट इन लर्निंग होता है।

 

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-Mradul tripathi

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