Abdul Kalam Death Anniversary 2019 : मौत के आखिरी पल में अब्दुल कलाम दे गए थे सौगात

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मिसाइल मैन के नाम से जाने वाले देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम (Abdul Kalam) का देश हमेशा आभार रहेगा। 2020 तक भारत को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने का सपना देखने वाले और लोगों को इसके लिए जागरूक करने वाले कलाम ने मरतेदम तक देश की सेवा करते रहे। उन्होंने अपने जीवन के आखिरी पलों में भी देश को सौगात दे दी। आज उनकी पुण्यतिथि (APJ Abdul Kalam Death Anniversary 2019) पर देश में ही नहीं विदेश में भी कई लोग उन्हें याद कर रहे हैं। इस मौके पर भारत सरकार के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बड़ा खुलासा किया।

अब्दुल कलाम का जीवन परिचय (APJ Abdul Kalam Death Anniversary 2019)

एपीजे अबदुल कलाम (APJ Abdul Kalam Death Anniversary 2019) का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ था। उनके पिता मछुआरे थे। वे अपने जीवन में सभी को प्रेरणा देते रहे। कलाम मदरसे में पढ़ने के बाद कलाम अखबार बेचते थे। उन्होंने भौतिकी और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और इसरो पहुंचकर भारत के मिसाइल प्रोग्राम में अहम योगदान दिया। इसके बाद साल 2002 से 2007 तक भारते के 11वें राष्ट्रपति के रूप में देशी की सेवा की। 27 जुलाई 2015 को इस देश ने एक अनमोल रतन खो दिया। डॉ कलाम आईआईएम शिलोंग में छात्रों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दो दर्जन किताबें भी लिखीं. लेकिन फिर भी अपने ट्विटर प्रोफाइल पर खुद को एक ‘लर्नर’ ही लिखते थे।

मौत के पहले सौगात

भारत सरकार के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) का कहना है कि कलाम ने अपने आखिरी वक्त में भी देश के लिए बड़ा काम कर दिया। उन्होंने देश में दोबारा इस्तेमाल होने वाली मिसाइल के विकास का सुझाव दिया था। प्रो. कलाम ने अपने निधन से एक महीने पहले यह सुझाव डीआरडीओ के वर्तमान महानिदेशक सतीश रेड्डी को दिया था। रेड्डी उस समय रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार थे। पूर्व राष्ट्रपति कलाम खुद भी बड़े रक्षा वैज्ञानिक थे। इस बारे में सतीश रेड्डी ने कहा, “भारत आने वाले पांच साल में रक्षा उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बन जाएगा। तब हम जटिल तकनीक वाले हथियार और रक्षा उपकरण भी हम तैयार करेंगे, किसी भी उत्पाद के लिए हमें विदेश का रुख नहीं करना पड़ेगा।”

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