पब्लिक ट्रांसपोर्ट में असुरक्षित महसूस करती हैं…

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जहां देश में सरकार बेटियों की सुरक्षा के कई दावे करती है, वहीँ आज भी देशभर में  लड़कियां खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं| लड़कियों के साथ बढ़ती घटनाओं को सुनकर यह असुरक्षा जायज़ भी है| हाल ही में हुई एक स्टडी में इस बात की पुष्टि हुई है| स्टडी की रिपोर्ट में सामने आया है कि भारत में 11 से 18 वर्ष की लड़कियां सार्वजनिक स्थलों पर खुद को असुरक्षित समझती हैं|

‘विंग्स 2018: वर्ल्ड ऑफ इंडियाज गर्ल्स’ नाम की स्टडी में बताया गया है कि 47 फीसदी शहर और 40 फीसदी गांव की यंग लड़कियां पब्लिक ट्रांसपोर्ट को इस्तेमाल करने में खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं| इस स्टडी को इंटरनेशनल नॉन गवर्मेंटल आर्गेनाइजेशन ‘सेव द चिल्ड्रेन इन इंडिया’ द्वारा प्रकाशित किया गया है| इस स्टडी में 30 शहर, 84 गांव और 12 जिलों को शामिल किया गया है| स्टडी की रिपोर्ट के मुताबिक, 3,128 टीनएजर्स लड़कियां, 1,141 टीनएजर्स लड़के , 248 महिलाओं ( उम्र 19 से 22) की कम उम्र में जबरदस्ती शादी कराई गई है| इनमें 842 लोग टीनेजर्स के पैरेंट्स बन चुके हैं|

स्टडी की रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि बड़े शहरों की केवल 44 फीसदी लड़कियां ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने में असुरक्षित महसूस करती हैं, वहीं इसके मुकाबले मध्य और छोटे शहरों की 51 फीसदी महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं| इसी तरह छोटे गांव की 42 फीसदी लड़कियां और बड़े गांव की 39 फीसदी लड़कियां पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर करने से कतराती हैं| यह स्टडी भारत के 6 राज्यों में की गई है| जिसमें असम, दिल्ली एनसीआर, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र ,तेलंगाना, और वेस्ट बंगाल शामिल है|

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