दुमका ट्रेजरी केस में 37 दोषियों को सजा

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चारा घोटाला से जुड़े दुमका ट्रेजरी केस के तीसरे मामले (आरसी 45/96) में सीबीआई के स्पेशल कोर्ट ने आज 37 दोषियों को 3 से 14 साल की सजा सुनाई है। सभी पर 50 लाख से 2 करोड़ रुपए तक जुर्माना भी लगाया गया है। इस केस में 9 अप्रैल को 37 आरोपियों को दोषी करार दिया गया था। साथ ही 5 को बरी भी कर दिया गया था। चारा घोटाला का यह 51वां मामला है।

नहीं जुड़ा कोई नेता

इस घोटाले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालूप्रसाद यादव के अलावा किसी भी राजनेता का नाम नहीं जुड़ा है। इसमें पशुपालन विभाग के अधिकारी, डॉक्टर और आपूर्तिकर्ता शामिल हैं।

यह है मामला

यह मामला दुमका ट्रेजरी से 1991-92 और 1995-96 के दौरान किए गए फर्जी आवंटन से जुड़ा है। इसके तहत 34 करोड़ 91 लाख 54 हजार 844 रुपए की अवैध निकासी की गई थी। इस मामले में 42 आरोपियों ने सुनवाई का सामना किया था। दुमका ट्रेजरी के मामले में जिले के तत्कालीन मजिस्ट्रेट राजीव अरुण एक्का ने 22 फरवरी 1996 को दुमका टाउन थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। 15 अप्रैल 1996 को सीबीआई ने केस संख्या आरसी 45ए/96 के तहत 72 आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू की थी। 12 अक्टूबर 2001 को अदालत नें चार्जशीट दायर की गई। वहीं 24 जुलाई 2004 को 60 अभियुक्तों के खिलाफ अदालत में चार्जफ्रेम हुआ। ट्रायल के दौरान 14 अभियुक्तों का निधन हो चुका है| दो ने अपराध स्वीकार किया और एक अब तक फरार चल रहा है। एक आरोपी को हाईकोर्ट से राहत मिल चुकी है।

ये हैं दोषी

इस मामले में दोषी विमलकांत दास, फ्रेडी केरकेट्टा, दिनेश्वर प्रसाद शर्मा, हरेंद्रनाथ वर्मा, कृष्णा कुमार प्रसाद, कृष्ण मुरारी साह, मनोज श्रीवास्तव, नंदकिशोर प्रसाद, ओमप्रकाश दिवाकर, पंकज मोहन भूई, पितांबर झा, रघुनंदन प्रसाद, राधामोहन मंडल, शशि कुमार सिन्हा और सवेंदु कुमार दास हैं।

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