मुंबई धमाकों की 27 वीं बरसी, पढ़ें साजिश की पूरी कहानी

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आज की तारीख 12 मार्च (27th Anniversary Of Mumbai Bombings) जिसे कोई भी हिन्दुस्तानी कभी याद नहीं रखना चाहेगा लेकिन आज के इस काले दिन की तारीख को चाह कर भी भुलाया नहीं जा सकता। हिन्दुस्तान के इतिहास में ये तारीख काले दिन और एक बेहद बुरी याद के रूप में दर्ज है। आज की तारीख आते ही हरेक देशवासी की आंखें नम हो जाती हैं। आज से 27 साल पहले देश को दहलादेने वाली घटना हुई थी। इस घटना के तहत मुंबई में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे जिसमें 257 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी और तकरीबन 800 लोग जख्मी हुए थे। साल 1993 में हुई इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इन धमाकों में 27 करोड़ रुपए की संपत्ति भी नष्ट हो गई थी। आतंकवादी दुनिया को दहलाने के लिए इस तरह के बम धमाके करते हैं लेकिन दुनिया के इतिहास में पहली बार आतंकियों ने इतने बड़े पैमाने पर सीरियल बम धमाके किए थे। इसके बाद जांच शुरू हुई तो 129 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किए गए लेकिन भारत की लचर न्याय प्रणाली के चलते आरोपियों को सजा सुनाए जाने में 14 साल का समय लगा।

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सजा का रिकॉर्ड

इन सीरियल बम धमाकों (27th Anniversary Of Mumbai Bombings) के मामले में भारतीय न्याय प्रणाली ने एक नया रिकॉर्ड बनाया। दरअसल इस मामले में मुंबई की विशेष टाडा अदालत ने 100 आरोपियों को एक साथ सजा सुनाई थी जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। धामकों की घटना के 14 साल बाद यानी साल 2007 में यह सजा सुनाई गई। वहीं बम धमाकों के इस मामले में आरोपी याकूब मेमन को साल 2015 में फांसी दे दी गई। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई (Mumbai) में एक के बाद एक लगातार 12 धमाके हुए थे और इस मामले में टाडा अदालत ने अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम (Underworld Don Abu Salem) को दोषी ठहराया था। अबू सलेम ने भी बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त को हथियार देने की बात को स्वीकार किया था। अबू सलेम को अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई जिसके बाद उसे मुंबई की आर्थर रोड जेल में रखा गया। मुंबई ब्लास्ट के ही एक अन्य मामले में बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त को अवैध हथियार रखने का दोषी पाया गया था। उनके घर से अवैध हथियार भी बरामद हुए थे। जिसके बाद टाडा कोर्ट ने उन्हें 5 साल की सजा सुनाई थी।

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ब्लास्ट का मास्टरमाइंड

मुंबई (27th Anniversary Of Mumbai Bombings) के सिलसिलेवार धमाकों की पूरी योजना तैयार की थी अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम (Underworld Don Dawood Ibrahim) ने, जो साल 1995 से फरार है और उसे अभी तक पकड़ा नहीं जा सका। मास्टरमाइंड दाऊद इब्राहिम की योजना के तहत मुंबई में 12 जगहों का चुनाव किया गया जहां धमाकों को अंजाम दिया गया।

धामकों की पूरी कहानी

12 मार्च 1993 शुक्रवार (27th Anniversary Of Mumbai Bombings) के दिन इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया जिसे ब्लैक फ्राइडे का नाम दिया गया। दरअसल 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को ढहा दिया गया था। मस्जिद को गिराए जाने के बाद देश भर में दंगे फ़ैल गए थे। इन्हीं दंगों में सोने की तस्करी करने वाले टाइगर मेमन का पूरा धंधा चौपट हो गया। मेमन अपना धंधा चौपट हो जाने की वजह से बदले की आग में जलने लगा और किसी भी हालत में मुंबई को तबाह करने की कोशिश में लग गया। इसके बाद उसने दाऊद इब्राहिम के साथ मिलकर मुंबई धमाकों की पूरी रूप रेखा तैयार की। इन धमाकों का पूरा खाका तैयार करने के लिए दुबई में एक खुफिया मीटिंग बुलाई गई। इस मीटिंग में तय हुआ कि कुछ नौजवानों को बम बनाने की ट्रेनिंग लेने के लिए पाकिस्तान भेजा जाए। ट्रेनिंग के बाद ये लोग पूरी तरह से तैयार थे मुंबई को दहलाने के लिए। मुंबई में इन लोगों को हथियार और गोला-बारूद मुहैया करवाने की जिम्मेदारी निभाई पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim)  ने। योजना के तहत आखिर वो ब्लैक फ्राइडे आ गया जिसे इन आतंकियों को इंतजार था। इसके बाद इन सिलसिलेवार धमाकों को अंजाम दिया गया।

कहां-कहां हुए थे धमाके?

जिन 12 जगहों को चिन्हित किया गया था (27th Anniversary Of Mumbai Bombings) उनमे बांबे स्टॉक एक्सचेंज, कलबा देवी, शिवसेना भवन के पास पेट्रोल पंप, एयर इंडिया (Air India)  बिल्डिंग, फिशमैन कॉलोनी, वर्ली बाजार, झावेरी बाजार, होटल सी रॉक, प्लाजा सिनेमा दादर, होटल जुहू सेंटर, शहर एयरपोर्ट और होटल एयरपोर्ट सेंटूर शामिल थे। पहला बम धमाका दोपहर 1 बजकर 30 मिनट पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज बिल्डिंग के सामने हुआ। इसके बाद शुरू हुआ धमाकों का सिलसिला जिसने कई मासूम लोगों की जान ले ली।

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Prabhat Jain

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