10 हजार करोड़ की मंज़ूरी

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आज दुनियाभर के सभी देश अंतरिक्ष में अपने उपग्रह स्थापित करने के आमूलचूल प्रयास कर रहे हैं| इनमें भारत कहां पीछे रहने वाला है | अब भारत सरकार ने पोलर उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) और भू-समकालिक (जिओसिंक्रोनस) उपग्रह प्रक्षेपण वाहन मार्क -3 कार्यक्रमों को जारी रखने को मंजूरी दे दी है| इस पर संयुक्त रूप से 10,000 करोड़ रुपए से अधिक की लागत आएगी|

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इन दोनों कार्यक्रमों के संचालन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने को मंजूरी दी है|

पीएसएलवी कार्यक्रम पृथ्वी अवलोकन, दिशा सूचक और अंतरिक्ष विज्ञान के लिए सेटेलाइट के प्रक्षेपण की आवश्यकता को भी पूरा करेगा| यह भारतीय उद्योग में उत्पादन जारी रखना सुनिश्चित करेगा| इसके लिए कुल 6,131 करोड़ रुपए के कोष की आवश्यकता है और इसमें 30 पीएसएलवी यान, आवश्यक सुविधा बढ़ाने, कार्यक्रम प्रबंधन और प्रक्षेपण अभियान की लागत शामिल है| 2019-2024 की अवधि के दौरान सभी परिचालन अभियान संपन्न हो जाएंगे| जीएसएलवी (एमके -III) में दस उड़ानें शामिल हैं तथा जिसकी कुल अनुमानित लागत 4338.20 करोड़ रुपए है| जीएसएलवी एमके -III निरंतरता कार्यक्रम – चरण 1 परिचालन उड़ानों का पहला चरण है, जो देश की उपग्रह संचार आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए चार टन वर्ग के संचार उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में सक्षमता प्रदान करेगा|

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