बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की संख्या तीन गुना

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आज पूरे देश में बच्चों के विरुद्ध होने वाली हिंसा तेज़ी से बढ़ रही है| वर्ष 2016 के नेशनल क्राइम ब्यूरो (एनसीबी) ने जो आंकड़े जारी किए हैं, उनके अनुसार बड़ों द्वारा बच्चों के विरुद्ध किए जाने वाले अपराधों की संख्या 90 हज़ार से अधिक रही, जो चिंता का विषय है|

यह बात सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधिपति जस्टिस मदन बी. लोकुर ने इंदौर में मीडिया से चर्चा के दौरान कही| जस्टिस लोकुर किशोर न्याय अधिनियम 2015 के प्रभावी क्रियान्वयन एवं  समेकित बाल संरक्षण योजना की वर्तमान स्थिति पर यहां आयोजित वेस्टर्न रीज़नल कन्वेंशन में हिस्सा लेने आए थे| इस कन्वेंशन में पांच राज्यों के प्रतिनिधि भाग लेने आए हैं| यह कॉन्फ्रेंस सर्वोच्च न्यायालय, किशोर न्याय समिति, मप्र उच्च न्यायालय, किशोर न्याय समिति और यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित की गई|

वेस्टर्न रीज़नल कन्वेंशन में हिस्सा लेने के बाद सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधिपति जस्टिस लोकुर ने मीडिया से चर्चा की और अनेक सवालों के जवाब दिए| जस्टिस लोकुर ने मीडिया के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि पिछले तीन साल से पूरे देश में इस तरह की कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही है | इसके पीछे मुख्य उद्देश्य जिम्मेदार लोगों को संवेदनशील बनाना है|

उन्होंने कहा कि बच्चों की गलती पर सिर्फ उन्हें थप्पड़ मारकर नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए बल्कि उनकी गलती पर उन्हें समझाना चाहिए|  बच्चों को बताना चाहिए कि एक जिम्मेदार नागरिक कैसे बनें| उन्होंने कहा कि आज बच्चों के लिए उचित माहौल, अच्छी शिक्षा और अच्छा स्वास्थ्य ज़रूरी है और यह इनका अधिकार भी है| उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि हमें बड़ों द्वारा बच्चों के विरुद्ध होने वाली हिंसा पर भी बहस करनी होगी| उन्होंने चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर भी बेबाक अंदाज़ में अपनी बात कही और कहा कि पोर्न साइट बच्चे नहीं बड़े बनाते हैं| इस कन्वेंशन में पांच राज्यों के प्रतिनिधि भाग लेने आए हैं|

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