नासा ने आयोजित की प्रतियागिता ‘सीओटू कन्वर्जन चैलेंज’

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सीओटू कन्वर्जन चैलेंज (CO2 Conversion Challenge) को जीतने वाले को 35 लाख का ईनाम दिया जाएगा। ये प्रतियोगिता नासा की ओर से आयोजित की जा रही है। इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य मंगल ग्रह पर उतरने वाले मनुष्यों को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्हें खुद ही अपना भोजन पैदा करना होगा, खुद ही पानी का इंतजान करना होगा और उन सभी चीजों को खुद तैयार करना होगा, जो लाल ग्रह पर उसके जीवन के लिए जरूरी हैं। मंगल ग्रह पर जीवन की तलाश जारी है। जिसकी खोज में जुटे वैज्ञानिकों के सामने वहां की वायुमंडल में मौजूद कार्बन डाईऑक्साइड बड़ी चुनौती बन गई है। मंगल ग्रह की हवा में ऑक्सीजन नहीं के बराबर और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा 96 प्रतिशत है। ऐसे में नासा के वैज्ञानिको के लिए सबसे बड़ी चुनौती है मंगल गृह पर बिना ऑक्सीजन के जीवन। अब इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने सीओटू कन्वर्जन चैलेंज नाम की एक प्रतियोगिता का आयोजन किया है।

इस प्रतियोगिता में जीतने वाले व्यक्ति को 35 लाख रुपए का ईनाम भी दिया जाएगा। ‘सीओटू कन्वर्जन चैलेंज’ के तहत लोगों से कहा गया है कि वो ऐसे आइडिया लेकर आएं, जिनसे मंगल ग्रह पर मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड से भरे वायुमंडल को जीवन के लिए उपयोगी बनाया जा सके। मंगल ग्रह पर मौजूद कार्बन डाईऑक्साइड को अन्य उपयोगी यौगिकों में कैसे बदला जाए, प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य यही है।

अगर ऐसी कोई तरकीब नासा को मिल जाती है तो आने वाले समय में मंगल पर जीवन की खोज को नई राह मिल जाएगी। साथ ही इन तरीकों का इस्तेमाल आने वाले समय में मंगल ग्रह पर होने वाले नासा के अनुसंधानों के दौरान भी किया जाएगा।  नासा ऐसी 5 सफल टीमों को 35-35 लाख रुपए तक ईनाम देगा, जिसकी घोषणा अप्रैल 2019 में होगी।

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