ज्योतिरादित्य सिंधिया के जाने से कांग्रेस की राजनीति में क्या बदलेगा

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मध्यप्रदेश में कांग्रेस (Changes In Congress) का बड़ा चेहरा रहे और हर मंच पर राहुल गांधी (Rahul Gandhi)  के साथ नज़र आने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) अब कांग्रेस में नहीं हैं। ऐसे में सिंधिया के जाने से जितना फायदा भाजपा का हुआ है, उससे कहीं ज्यादा नुकसान कांग्रेस का हुआ है। ऐसे में अब सवाल यह भी उठ रहे हैं कि सिंधिया ने कांग्रेस के मझधार में हिंडोले खाते संगठन को और भी उथल-पुथल कर दिया है। सिंधिया के कांग्रेस से जाने के बाद कांग्रेस में क्या बदलेगा, आईये नज़र डालते हैं इन बिंदुओं पर।

– कांग्रेस (Congress) में बीते 17 सालों से रहे सिंधिया को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं। पहले सांसद, फिर दो बार केंद्रीय मंत्री, फिर राष्ट्रीय महासचिव और उत्तरप्रदेश के प्रभारी, इसके बाद महाराष्ट्र चुनाव में महाराष्ट्र के पर्यवेक्षक इसके अलावा हर मंच पर राहुल गांधी के मुख्य सिपासालार के तौर पर सिंधिया हमें नज़र आए।

– सिंधिया की मंच पर बोलने की शैली ने उन्हें युवाओं के बीच खासा लोकप्रिय बनाया, जिसके चलते ही उन्हें मध्यप्रदेश के संभावित मुख्यमंत्री के दावेदार के तौर पर भी जाना जाने लगा। लोगों का भी यही मानना है कि सिंधिया के नाम पर ही प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को वोट दिया।

– जब भी बात भाजपा या उसके बड़े नेताओं (Changes In Congress)  को घेरने की आती तो कांग्रेस हमेशा सिंधिया को ही आगे करती। फिर चाहे वह संसद हो या कोई राजनीति मंच। सिंधिया ने हमेशा ही भाजपा के बड़े नेताओं जिनमें प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह भी शामिल हैं, पर तीखा हमला बोला।

लेकिन जब सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ी तो उनके शब्द थे कि वे कांग्रेस नेता राहुल गांधी से काफी दिनों से मिलना चाह रहे थे, लेकिन उन्हें अप्वाइंटमेंट नहीं मिला। इस पर राहुल गांधी ने कहा, ‘‘वह कांग्रेस में एकमात्र ऐसे शख्स हैं जो मेरे घर में कभी भी आ सकते हैं।‘‘

राहुल से नहीं मिल पाने को लेकर सिंधिया के करीबी रहे और शाही परिवार से आने वाले नेता प्रद्योत माणिक्य देबबर्मा ने भी कही।  देबबर्मा का सिंधिया परिवार के साथ जुड़ाव भी है। कुछ ही महीने पहले पार्टी से दूरी बनाने वाले त्रिपुरा कांग्रेस प्रमुख रहे प्रद्योत माणिक्य देबबर्मा ने कहा, ‘‘मुझे पता है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया महीनों से राहुल गांधी से मिलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हे कोई अप्वाइंटमेंट नहीं मिला। अगर वह (राहुल गांधी) हमें नहीं सुनना चाहते थे, तो उन्होंने हमें पार्टी में क्यों रखा?”

वहीं सिंधिया के जाने से राहुल गांधी (Changes In Congress)  काफी ज्यादा भावुक भी नज़र आए। उन्होंने लगभग एक साल पहले के उनके पोस्ट को रिट्वीट किया, जब उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की लड़ाई में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच शांति स्थापित की थी। राहुल गांधी ने लियो टॉलस्टॉय के विचार को ट्वीटर पर ट्वीट करते हुए लिखा था, ‘‘दो सबसे शक्तिशाली योद्धा हैं धैर्य और समय।‘‘

उन्होंने कहा, आज कांग्रेस पार्टी वह नहीं रही जो पहले थी। मैं मानता हूं कि इस वातावरण में राज्य मध्यप्रदेश में एक सपना हमने पिरोया था, जब हमारी सरकार बनी, लेकिन 18 माह में वे सपने बिखर गए। किसानों की कर्ज माफी 18 माह में भी नहीं हो पाया। ओलावृष्टष्टि से प्रभावित किसानों को मुआवजा नहीं मिला। वचन पत्र में कहा था कि हर महीने मूल्यांकन होगा। लेकिन प्रदेश में ट्रांसफर उद्योग और रेत माफिया चल रहा है।‘‘

अब आगे क्या-

– राहुल गांधी के साथ हर मोर्चे पर खड़े रहने वाले सिंधिया के जाने से राहुल गांधी काफी अकेले पड़ सकते हैं। आने वाले दिनों में जिन भी राज्यों में चुनाव होंगे वहां राहुल गांधी को अकेले ही ताकत दिखानी पड़ेगी।

– कांग्रेस (Changes In Congress) संगठन में लगातार हो ही गुटबाज़ी और फूट को रोकने के लिए सोनिया गांधी को बड़ी प्रशासनिक सर्जरी करनी पडे़गी।

– कमलनाथ और दिग्विजयसिंह के खिलाफ कांग्रेस में रहते सिंधिया नहीं बोल पाते थे, लेकिन अब हर सार्वजनिक मंच से सिंधिया उन्हें घेरेंगे। इससे सिंधिया का कद प्रदेश में बढ़ेगा। जबकि कमलनाथ और दिग्विजयसिंह के लिए मुश्किलें खड़ी होंगी।

– राहुल गांधी के बाद सिंधिया ही कांग्रेस का सबसे युवा चेहरा थे। सिंधिया के बाद अब कोई युवा नेता ऐसा नहीं है, जो युवाओं को कांग्रेस के प्रति आकर्षित कर सके।

– राहुल गांधी यदि अभी भी सिंधिया से दोस्ती निभाते हैं और भावुकता में कुछ भी नहीं कहते हैं, तो इसका खामियाज़ा भी कांग्रेस संगठन को ही भुगतना पड़ेगा, जिससे कांग्रेस को नुकसान होगा।

अब देखना होगा कि राहुल गांधी सिंधिया सदमें से कैसे उभर पाते हैं। और हमेशा ही उन्हें रोकने की कोशिशें करने वाले कमलनाथ और दिग्विजयसिंह उन्हें अब कैसे पछाड़ते हैं।

Rahul Tiwari / Prabhat

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