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भस्म आरती में आने वाले भक्तों की सुविधा के लिए विशेष इंतज़ाम

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उज्जैन (ujjain) में प्रतिदिन सुबह 4 बजे होने वाली आरती को भस्म आरती इसलिए कहा जाता है क्योंकि महाकाल बाबा (mahakaleshwar mandir) की पहली आरती के समय बाबा महाकाल का श्‍मशान में जलने वाली सुबह की पहली चिता के भस्म से श्रृंगार किया जाता है। इस आरती में शामिल होने के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है| इसके लिए लोग पहले से रजिस्‍ट्रेशन करवाते हैं| अब भस्म आरती में आने वाले भक्तों की सुविधा के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं|दरअसल, महाकालेश्वर मंदिर में जल्द ही भस्मआरती में शामिल होने आए श्रद्धालुओं को सड़क पर कतार लगाने के बजाय शेड में बैठाया जाएगा (Shade Will Be Built For Devotees Coming To Bharmarti)। यहां उनके लिए पेयजल और सुविधाघर भी रहेगा। इससे श्रद्धालुओं को खुली सड़क पर बैठने की समस्या से निजात मिलेगी।

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अभी श्रद्धालु रात 12 बजे बाद से ही प्रवेश द्वार पर कतार में लग जाते हैं। खुली सड़क पर रातभर खड़े रहते हैं। इस दौरान उन्हें ठंड और बारिश के मौसम का सामना करने के साथ गरमी में मच्छरों से भी निपटना पड़ता है। मंदिर समिति अध्यक्ष एवं कलेक्टर शशांक मिश्र ने सोमवार भस्मआरती व्यवस्था का निरीक्षण करने के बाद अधिकारियों को भस्मआरती दर्शनार्थियों की नई व्यवस्था के निर्देश दिए थे (Shade Will Be Built For Devotees Coming To Bharmarti)। मंगलवार को नई व्यवस्था के लिए सहायक प्रशासनिक अधिकारी चंद्रशेखर जोशी, दिलीप गरुड़, तहसीलदार मूलचंद जूनवाल आदि ने फेसिलिटी सेंटर और विश्रामधाम पहुंचकर नई व्यवस्था पर चर्चा की।

Shade will be built for devotees coming to Bharmarti

फेसिलिटी सेंटर के पास शेड में श्रद्धालुओं की कतार के लिए पुलिस के पीले रंग के बेरिकेड्स की जगह अब नए स्टील के बेरिकेड्स लगाए जाएंगे। पहली खेप में 60 बेरिकेड्स आए हैं। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के बैठने के लिए गार्डन चेयर्स भी दान में मिली है। यहां से सामान्य श्रद्धालु प्रवेश करेंगे तथा फेसेलिटी सेंटर से होकर गणेश और कार्तिकेय मंडप में जाएंगे। फेसेलिटी सेंटर में उन्हें आरओ वाटर व सुविधाघर उपलब्ध रहेगा।विश्रामधाम के बाहर ही सुविधाघर और पेयजल के लिए आरओ लगा है। दोनों जगह यात्री सुरक्षित जगह कतार में लगकर या बैठक कर भस्मआरती में प्रवेश के लिए इंतजार कर सकेंगे।

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ऐसे शुरू हुई भस्‍म आरती की परंपरा

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पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि प्राचीन काल में दूषण नाम के एक राक्षस की वजह से पूरी उज्‍जैन नगरी में हाहाकार मचा था। नगरवासियों को इस राक्षस से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान शिव ने उसका वध कर दिया। फिर गांव वाले भोले बाबा से यहीं बस जाने का आग्रह करने लगे। तब से भगवान शिव महाकाल के रूप में वहां बस गए। शिव ने दूषण को भस्‍म किया और फिर उसकी राख से अपना श्रृंगार किया। इसी वजह से इस मंदिर का नाम महाकालेश्‍वर रख दिया गया और शिवलिंग की भस्‍म से आरती की जाने लगी।

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