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शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ ने ली अंतिम सांस

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भानपुरा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ (Shankaracharya Swami Divanand Tirtha Passes Away) का लंबी बीमारी के कारण देवलोकगमन हो गया। दिल्ली के एम्स में शनिवार सुबह करीब 8.30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए बाबूगढ़ के गांव छपकौली स्थित आश्रम में रखा जाएगा। शाम के समय उनके पार्थिव शरीर को ब्रजघाट गंगा में जल में प्रवाहित किया जाएगा। सूचना पर देश-विदेश में रहने वाले उनके अनुयायियों में शोक की लहर दौड़ गई।

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भानपुरा पीठाधीश्वर स्वामी दिव्यानंदजी तीर्थ (Shankaracharya Swami Divanand Tirtha Passes Away) वर्ष 1990 से उज्जैन से जुड़े हैं। यद्यपि भानपुरा पीठ उज्जैन संभाग के ही अंतर्गत है। उनके पहले स्वामी सत्यमित्रानंदजी गिरि इस पीठ पर विराजमान थे, परंतु बाद में उन्होंने पीठ को त्यागकर स्वतंत्र रूप से भारत माता मंदिर हरिद्वार में स्थापना की और वे भारतीय संस्कृति एवं दर्शन का देश में विदेशों में प्रचार-प्रसार करने लगे। इनके बाद स्वामी दिव्यानंदजी तीर्थ ने इनकी परंपरा को आगे बढ़ाया|

उन्होंने (Shankaracharya Swami Divanand Tirtha Passes Away) अपना पहला चातुर्मास उज्जैन में ही किया था। वर्ष 1992 के सिंहस्थ व 2004 के सिंहस्थ में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। तब से उनके भक्तों की संख्या मालवा में ही नहीं बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में बढ़ी है। यूं तो उत्तरप्रदेश में गाजियाबाद, छपकोली, मेरठ तथा पंजाब में अंबाला, अमृतसर, लुधियाना और इंग्लैंड व अमेरिका में भी भक्तजन हैं परंतु लंदन, बर्मिंघम व लीस्टर में उनके भक्तों की संख्या देखते ही बनती थी।

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स्वामी दिव्यानंद तीर्थ जनपद बुलंदशहर के गांव वैरा फिरोजपुर में 4 जनवरी 1953 को रजनीकांत शर्मा के यहां हुआ था। उनकी प्राथमिक शिक्षा नागालैंड की पहाड़ियों और माध्यमिक शिक्षा उड़ीसा के भुवनेश्वर और पश्चिमी बंगाल के सैनिक स्कूल में हुई। कॉलेज की शिक्षा असम की गुवाहाटी विश्वविद्यालय में हुई। वह कोहिमा कॉलेज में कोहिमा की पत्रिका के छात्र संपादक भी थे। 1984 में चित्रकूट में स्वामी हरिश्वरानंद तीर्थ ने उन्हें संन्यास में दीक्षा दी। जनपद मुजफ्फरनगर में विष्णु आश्रम में उन्हें दंडी स्वामी के साथ विभिन्न शास्त्रों का ज्ञान दिया गया। वर्ष 1989 में वह भानपुरा पीठाधीश्वर के 11वें उत्तराधिकारी बने।

शनि जो कुंभ लग्न में है

एक बार स्वामीजी से पूछा गया कि आपको संन्यासी किसने बनाया? तो वे तुरंत बोले – ‘शनि’ ने जो कुंभ लग्न में है अन्यथा नागालैंड के आर्मी स्कूल का धाराप्रवाह अंगरेजी बोलने वाला छात्र संन्यास की ओर अचानक यकायक कैसे मुड़ जाता |

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पिछले काफी समय से वे बीमार चल रहे थे। उनका इलाज गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में चल रहा था। हाल ही में तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें एम्स में भर्ती किया गया था, जहाँ उनका निधन हो गया|

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टैलेंटेड इण्डिया की ओर से स्वामी दिव्यानंदजी तीर्थ को शत-शत नमन।

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