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मंत्रियो का ऐसा रुतबा आरक्षक से लेकर अधिकारी तक कर रहे चरण-वंदना

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भोपाल: हमारी संस्कृति में अपने से श्रेष्ठ और वरिष्ठजनों की चरण वंदना करना आदर- सम्मान की श्रेणी में आता है। यह पूर्णतया निस्वार्थ भाव से किया जाता है बदले में चरण वंदना करने वाले को वरिष्ठों के द्वारा आशीर्वाद दिया जाता है । लेकिन इसके आलावा भारतीय सियासत में भी चरण वंदना का सिलसिला काफी पुराना है। और इसमें ऐसा कहा जाता है जो जितना झुकता है उसे उतना ही अच्छा प्रसाद मिलता है। अक्सर सियासत में किसी न किसी के द्वारा अपने से बड़े पद वाले नेता के चरण वंदना का मामला सामने आता रहता है। अभी हाल ही में एक आरक्षक के द्वारा प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तुलसी सिलावट (Tulsi Silawat) की चरण वंदना की गई थी जिसके बाद यह मामला बहुत सुर्ख़ियों में रहा था इस घटना ने पूरे पुलिस विभाग को शर्मसार कर दिया था।

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उसके बाद चरण वंदना का दूसरा मामला भी सामने आया जिसमे चरण वंदन करने वाले स्वयं कमलनाथ (Kamal Nath Government) सरकार में कैबिनेट मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर है जिन्होंने कांग्रेस (Congress) के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) की चरण वंदना की है। अब यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। विपक्ष कि ओर से कहा जा रहा हैं की ये मंत्री पद का अपमान है मध्‍य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने इसे लोकतंत्र का अपमान बताया है।

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अभी यह मामला शांत नहीं हुआ और इसी बीच एक और इसी प्रकार का मामला सामने आया है इसमें एक अधिकारी मंत्री जी के आगे नतमस्तक होतीं नजर आ रही है। गुरु नानक जयंती (Guru Nanak Jayanti) पर देवास नगर निगम कमिश्नर संजना जैन मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के पैर छूती नजर आईं। इस पैर छूती निगमायुक्त का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही खलबली मच गई। इस पूरे मामले पर निगमायुक्त संजना जैन ने सफाई देते हुए कहा की मैं छुट्टी के दिन सिर ढंककर पूजा कर रही हूं। इस दौरान बड़ों का सम्मान कर रही हूं तो मैंने कौन-सा प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है। और सोचने वाली बात यह है की ये सभी घटनाएं मध्यप्रदेश की है जिसमे विशेषरूप से कमलनाथ (CM Kamal Nath) के मंत्री और अधिकारी शामिल है।

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जनता के द्वारा चुने गए इन सियासतदानो से जनता को उम्मीद होती है की ये उनकी समस्या की आवाज सीनातान कर ऊपर तक पहुचयेंगे लेकिन ये मंत्री -अधिकारी खुद ही ऊपर जाकर झुक जाते है। या तो खुद ही ऐसा रुतबा बना देते है की उनके सामने उनसे छोटे पदों वाले अधिकारी उनकी चरण वंदना करे।

-Mradul tripathi

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