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NCRB की चौंकाने वाली रिपोर्ट, इस मामले अव्वल आया MP

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मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh ) पिछले कुछ सालों में कई मामलों में अव्वल आ रहा है। कभी बाघों की संख्या के लिए नंबर वन तो कभी प्रदेश में दुष्कर्म के मामलों में नंबर वन। अब फिर से देश का हृदयपरदेश नंबर वन आया है, लेकिन वह इस बार पानी की किल्लत के बाद हुई हिंसा के मामलों में अव्वल आया है। प्रदेश में इस बार रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई है, लेकिन फिर भी पीने के पानी की किल्लत बनी रहती है (Madhya Pradesh Topped In Violence)। मौसम विभाग का भी कहना है कि इस बार भी पीने के पानी के लिए परेशानी का समाना करना पड़ सकता है। इसी किल्लत के कारण बढ़ती है हिंसा। इसी के साथ मध्यप्रदेश फर्जी खबरों के मामले में भी सबसे आगे है।

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पानी कि कमी से हिंसा

गर्मी के मौसम में पानी की समस्या बढ़ जाती है, जिसके बाद इसे लेकर शुरू हो जाती है मारामारी। इसी हिंसा में प्रदेश नंबर वन आ गया है। वर्ष 2017 में मध्यप्रदेश में पानी को लेकर हुई हिंसा में 14 लोगों को अपनी जान चली गई थी। वहीं अन्य 12 राज्यों को मिलाकर 50 लोगों की जान गई (Madhya Pradesh Topped In Violence)। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि  देशभर में पानी विवाद को लेकर हुईं घटनाओं में मप्र व महाराष्ट्र में ही 14-14 हुई हैं। इनके अलावा गुजरात, पंजाब, बिहार, कर्नाटक, उप्र, छग, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, तमिलनाडु व तेलंगाना में भी पानी की तंगी के दौरान कुल 22 लोगों कि मौत हुई।

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फर्जी न्यूज़ में अव्वल मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश के कुल 52 जिलों मे से 35 जिले जल संकट कि समस्या से जूझ रहे हैं। जल संकट से बचने के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएँ चलाई जा रही है, लेकिन फिर भी पानी कि समस्या खत्म नहीं हुई है। 4000 ऐसे गांव थे, जहां पानी का संकट था। 378 नगरीय क्षेत्रों में से 32 नगरीय निकायों में टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाया गया। कई स्थानों में जल की आपूर्ति कम कर दी गई है। मामूली विवाद में 854, जमीन-जायदाद के विवाद में 147, पारिवारिक झगड़े में 193, लेन-देन को लेकर 50, पुरानी रंजिश के कारण 386 लोगों की हत्या हुईं। मध्यप्रदेश फर्जी संदेश फैलाने के मामले में पहले नंबर पर रहा। यहां 138 मामले रिपोर्ट हुए। 32 मामलों के साथ यूपी दूसरे और 18 के साथ केरल तीसरे स्थान पर रहा। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इसमें 257 मामले दर्ज किए गए हैं।

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    – Ranjita Pathare 

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