मप्र : नैपकिन खरीदी में लाखों का घोटाला

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मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य विभाग में सेनेटरी नैपकिन खरीदी में लाखों रुपए का घोटाला हुआ है। बाजार में प्रचलित दर और लघु उद्योग निगम के रेट को दरकिनार कर अफसरों ने चार गुना ज्यादा दाम पर इनकी खरीदी कर ली। मामले में सरकार ने विभागीय जांच के आदेश भी दिए। दो साल पूरे हो गए, पर जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई और न किसी अफसर या कर्मचारी पर कार्रवाई हुई।

ऑडिट विभाग ने पकड़ा घोटाला

स्वास्थ्य विभाग का यह घोटाला सबसे पहले ऑडिट विभाग ने पकड़ा था। 2014 से 2016 तक के विभागीय ऑडिट के दौरान यह बात सामने आई कि स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने सेनेटरी नैपकिन की खरीदी लघु उद्योग निगम के बजाय बुरहानपुर के राज्य हथकरघा एवं पावरलूम बुनकर सहकारी संघ से की। खरीदी के मामले में ऑडिटर्स ने गहराई से पड़ताल की तो पता चला कि जो सेनेटरी नैपकिन का पैकेट लघु उद्योग निगम 27 रुपए में देता है, वह बुनकर संघ ने स्वास्थ्य विभाग को 106 रुपए में बेचा यानी चार गुना अधिक कीमत पर| सारे दस्तावेज खंगालने पर पता चला कि खरीदी में करीब 11 लाख रुपए का घपला हुआ है।

जांच हो

ऑडिट विभाग ने अक्टूबर 2016 में स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक को रिपोर्ट सौंपकर घपले की जांच करवाने को कहा था। तत्कालीन संयुक्त संचालक ने भी यह माना कि गड़बड़ी हुई है। लघु उद्योग निगम के रेट से ज्यादा दाम नहीं चुकाना चाहिए थे। उन्होंने तत्काल जांच की अनुशंसा कर दी। सरकार तक मामला पहुंचा तो भोपाल से भी आदेश जारी हुआ कि विभागीय जांच बैठाकर दोषियों पर कार्रवाई करें।

धांधली छिपाने की कोशिश

खरीदी में धांधली को छिपाने के लिए अफसरों ने कई कोशिशें की। उल्टे बिल जारी किए, भुगतान की तारीख में भी गलतियां कीं। विभाग ने ड्रेसिंग मटेरियल, दवाइयों और केमिकल की खरीदी भी की। इसमें यह बात सामने आई कि सालभर में जितना सामान लगता है, उससे ज्यादा खरीदी की गई।

अब तक कार्रवाई नहीं

इस मामले में तत्कालीन संयुक्त संचालक डॉ. शरद पंडित ने मामले में कार्रवाई के लिए सरकार को चिट्ठी भी लिखी। इसके साथ ही विभागीय जांच भी बैठा दी गई। जांच को दो साल पूरे होने को हैं, लेकिन अब तक किसी दोषी का नाम सामने नहीं आया न किसी पर कार्रवाई हुई।

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