‘शिव’राज में बच्चों के जीवन से बड़ी लापरवाही

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शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की ख़बरें मानो इन दिनों मध्यप्रदेश में आम हो गई हैं| ऐसा ही एक मामला खुद मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र से आया है|  मध्यप्रदेश के मुखिया शिवराजसिंह चौहान के अपने गृह विधानसभा क्षेत्र सीहोर के सरकारी स्कूल में बच्चों की ज़िंदगियों के साथ बड़ा खिलवाड़ हो रहा है|

एक और सरकार प्रदेश के भविष्य कहे जाने वाले बच्चों के लिए उत्तम व्यवस्था उपलब्ध करवाने की बात करती है वहीं दूसरी ओर इससे बड़ी विडम्बना और क्या हो सकती है कि इसी सरकार के शासन में बच्चों को एक्सपायरी डेट वाला दूध पिलाया जा रहा है| मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में बच्चों के स्वास्थ्य के साथ किया जा रहा यह खिलवाड़ अपने आप में कई सवालों को तो जन्म देता ही है साथ ही प्रदेश में सरकारी योजनाओं की ग्राउंड रियलिटी के लिटमस टेस्ट को भी कटघरे में खड़ा करता दिखाई दे रहा है|

जानकारी के अनुसार, कक्षा पहली से पांचवीं तक के सभी बच्चों को सप्ताह में तीन दिन मिल्क पाउडर पिलाया जाता है| जब यह पैकेज बच्चों को पिलाने के लिए खोले जाने की तैयारी की जा रही थी, तभी इनकी एक्सपायरी डेट पर नजर पड़ी | इन पैकेट्स पर 4 जून 2018 की एक्सपायरी डेट अंकित थी| स्कूल में करीब 86 बच्चे हैं, लेकिन हर माह केवल सात से आठ पैकेट मिल्क पाउडर देकर प्रशासन खानापूर्ति कर रहा है| मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में जब अनियमितताओं का यह आलम है तो पूरे प्रदेश की स्थिति के बारे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है|

शिवराज सरकार बेलगाम योजनाओं की शिल्पी बनकर वाहवाही तो लूट रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर दम तोड़ती इन योजनाओं की असलियत से भी वाकिफ़ करवा रही है|

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