शिवराज नहीं मानते प्रधानमंत्री की बात

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देश एक तरफ कोरोना वायरस के दंश को झेल रहा है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) लोगों से 22 तारीख को जनता कर्फ्यू का पालन करने की अपील कर रहे हैं। एक स्थान पर ज्यादा लोगों के इकट्ठा नहीं होने की अपील कर रहे हैं। वहीं उनकी ही पार्टी के नेताओं ने उनकी बात को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया। एक तस्वीर है जो इस बात का सबूत है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा जारी एडवायजरी के बावजूद भाजपा नेता किस तरह से अपने बड़े नेताओं की बात का मखौल उड़ा रहे हैं।

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ये तस्वीर है भाजपा के प्रदेश कार्यालय की। जहां मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के इस्तीफे के बाद मिठाईयां बांटी गई। ढोल-ढमाकों के साथ जश्न मनाया गया। इस जश्न में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे, पूर्व मंत्री विश्वास सारंग सहित लगभग 4 हज़ार भाजपा कार्यकर्ता मौजूद थे। इन कार्यकर्ताओं ने ना सिर्फ यहां सरकार गिरने का जश्न मनाया, बल्कि हाथ में हाथ डालकर फोटो भी खिंचवाई। सरकार गिरने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने अपने घर पर सभी विधायकों के रात्रि भोज यानी डिनर का भी इंतजाम किया था, लेकिन इसे बाद में निरस्त कर दिया गया। लेकिन यहां कुछ सवाल हैं जो हम पूछना चाहते हैं। हम सवाल पूछ रहे हैं भाजपा के उन तमाम सारे वरिष्ठ सदस्यों से जो उस जश्न का हिस्सा थे? हम सवाल पूछ रहे हैं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से जो हमेशा खुद को मध्यप्रदेश की जनता का सेवक बताते हैं? क्या आज हमारे राजनीतिक स्वार्थ आम लोगों की सुरक्षा से ज्यादा बड़े हो गए हैं? क्या एक सरकार गिरने पर जश्न मनाना हमारे लिए अनिवार्य है, वह भी तब जब दुनिया में कई जानें चली गई हैं? क्या देश के प्रधानमंत्री की अपील सिर्फ देश के नागरिक ही मानें, उनकी पार्टी के नेता क्या कोरोना के संक्रमण के दायरे से बाहर हैं?

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भाजपा के इस जश्न को लेकर कवि कुमार विश्वास ने भी ट्वीट किया और इसे गलत ठहराया। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता खुद प्रधानमंत्री मोदी की बात को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। वहीं कई और लोगों ने भी भाजपा के इस जश्न को लेकर नेताओं की आलोचना की। आप लोगों का क्या मानना है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा जारी एडवायजरी के बावजूद भाजपा नेताओं का इतनी बड़ी तादाद में इकट्ठा होना कितना सही है। क्या शिवराज सिंह द्वारा बुलाई गई इस भीड़ ने कार्यकर्ताओं की जान को खतरे में नहीं डाला है? आप कमेंट करके हमें अपनी राय जरुर बताएं…?

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Rahul Tiwari / Prabhat Jain

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