खतरनाक स्कूल में पढ़ने को मजबूर छात्राएं…

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मध्य प्रदेश सरकार को हमेशा शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात करते देखा जाता है| परंतु वास्तव में प्रदेश में अभी भी कुछ सरकारी स्कूल ऐसे है जहाँ छात्र छात्राओं को अपने बेहतर जिंदगी की बुनियाद मजबूत करने के लिए हर रोज जान जोखिम में डालना पड़ता है। हम बात कर रहे है एक ऐसे ही सरकारी  स्कूल की जिसका नाम शासकीय कन्या शाला है|

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जो की रायसेन जिले के गैरतगंज में स्थित है।  इस स्कूल की इमारत 70 वर्ष पुरानी है इसकी दीवारों और छत में दरार आ चुकी है जिसके कारण छत से बरसात का पानी टपकता है| भवन की छत लकड़ी की बल्ली के सहारे टिक्की हुई है तथा विद्यालय की प्रायोगिक कक्षा में बरसात का पानी भरा हुआ है|

इस जर्जर भवन में कक्षा 9 से 12 तक की छात्राये अध्ययनरत है जिनकी कुल संख्या 576  है| इस विद्यालय में छात्राओं की संख्या की तुलना में शिक्षकों की संख्या अत्यंत कम है जिससे यह विद्यालय अतिथि शिक्षकों के  भरोसे चलता है इन सब बाधाओं के बीच अगर किसी प्रकार छात्राये शिक्षा ग्रहण करने का प्रयास करती भी है तो बरसात के पानी से टपकती छत अवरोध उत्पन्न करती है तथा  लकड़ी की बल्ली के सहारे टिक्की छत किसी भी वक्त क्षतिग्रस्त हो सकती है यह कहना गलत नहीं होगा की यहाँ छात्राओं को एक बेहतर जीवन बनने के लिए हर रोज मृत्यु से होकर गुजरना पड़ता है क्यूँकि जर्जर इमारत किसी भी समय क्षतिग्रस्त हो सकती है|

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सबसे मुख्य और परेशान करने वाली बात यह है की यह पाठशाला प्रदेश के स्कूल और शिक्षा मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी के गृह ग्राम में आता है| और उन्ही के विधानसभा क्षेत्र में शामिल है|सरकार को मंच पर बड़े बड़े दावे करते अक्सर देखा जाता है लेकिन हकीकत इस जर्जर स्कूल से बिलकुल साफ़ है सबसे मुख्य बात निम्न और मध्यम वर्गीय परिवार की छात्राओं को है क्यूंकि आज के निजी स्कूल में अध्ययन हेतु उनके पास पर्याप्त आय नहीं है जिससे उनके पास इस विकल्प के अलावा और कोई रास्ता नहीं है| कुछ समय पहले छत का एक हिस्सा गिरा था लेकिन संतोष करने वाली बात यह है उस समय कोई छात्रा वहाँ मौजूद नहीं थी|

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सरकार के द्वारा प्रदेश का भविष्य बेहतर बनाने की बाते तो होती है लेकिन वास्तव में जहाँ प्रदेश का भविष्य बनाने वाले अध्ययनरत है उनपे कोई ध्यान है भवन के पुनर्निर्माण तरफ कोई पहल नहीं है।  इस लापरवाही के कारण किसी भी समय दुर्घटना की आशंका है।

 

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