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हनी ट्रैप रैकेट के चंगुल में पूर्व CM, मंत्री-नेता और कई बड़े अधिकारी

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मध्यप्रदेश में हनी ट्रैप रैकेट हाई प्रोफाइल मामला इन दिनों सुर्ख़ियों में है इस मामले में जांच की शुरुआत इंदौर नगर निगम के एक इंजीनयर के एफआईआर के आधार पे हुई जो की पलासिया थाने में की गई थी बुधवार को इस मामले में 5 लड़कियों को गिरफ्तार भी किया गया था जिसमे 3 युवतियों को भोपाल एवं 2 युवतियों को इंदौर से गिरफ्तार किया गया (Honey Trap Scandal In Bhopal)। इस गिरफ्तारी के बाद और भी बड़े खुलासे हुए जिसमे कई बड़े मंत्री और अधिकारी शामिल है प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी तक इस मामले में 15 लोगो के फंसे होने का पता चला है जिसमे कई अफसर एवं मंत्री एवं एक पूर्व मुख्यमंत्री भी है।

MP में हाई प्रोफाइल हनी ट्रैप मामले पर हुआ बड़ा खुलासा कई बड़े नाम….


हनी ट्रैप में फंसे अफसरों और नेताओं की सूची :-
पूर्व राज्यपाल – महिला का एनजीओ (NGO) के काम से राज्यपाल के पास आना-जाना था.
पूर्व मुख्यमंत्री – हनी ट्रैप (Honey Trap) में फंसने के बाद मामले में सेटलमेंट के लिए एक महिला को मकान दिया था.
मौजूदा मंत्री – रंगीन मिजाज की वजह से जाने जाते हैं.महिला का इनके पास आना जाना था.
2 पूर्व मंत्री – एनजीओ के काम से आने-जाने की वहज से पहचान हुई. कई सरकारी प्रोजेक्ट भी दिलाए.
पूर्व सांसद – हनी ट्रैप (Honey Trap) का शिकार होने के बाद महिला को बड़ी रकम दी थी.
बड़े नेता – एक राजनैतिक पार्टी संगठन के बड़े नेता हैं. पार्टी के कई नेताओं के साथ नौकरशाहों से मुलाकात में मदद की.
डीजी रैंक के अधिकारी – बड़े पद पर हैं. लूप लाइन में लंबे समय तक रहने के दौरान हनी ट्रैप में फंसे थे.
एडीजी रैंक के अधिकारी – एक शाखा में लंबे समय से पदस्थ हैं. सांस्कृतिक कार्यक्रम के चलते महिला से पहचान हुई.
5 आईएएस अधिकारी- मंत्रालय में एनजीओ के काम से बार-बार जाने की वजह से पहचान हुई. इनमें से कई अफसर फील्ड में पदस्थ हैं.

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पकड़े गए रैकेट ने ही एक सीनियर आईएएस अधिकारी का आपत्तिजनक वीडियो बनाकर वायरल किया था. पुलिस की जांच जारी है और शिकायतकर्ता के सामने आने के बाद कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है.
हनी ट्रैप करने वाले आरोपियों के बारे में कहा जा रहा है कि सबसे पहले आरोपियों ने छोटे अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ कारोबारियों को अपना निशाना बनाया था. इसके बाद आरोपियों ने राजनेताओं के बीच अपनी पकड़ को मजबूत करना शुरू कर दिया. राजनीतिक दलों के बीच मजबूत पकड़ होने के बाद आरोपियों ने कई नेताओं को हनी ट्रैप में फंसाया. इन्हीं नेताओं के सहारे कई सरकारी प्रोजेक्ट भी लिए और इसके बाद ब्यूरोक्रेट्स के बीच इनका उठना-बैठना शुरू हुआ. अब इस गिरोह के निशाने पर छोटे अधिकारी-कर्मचारी नहीं, बल्कि बड़े नेता और अधिकारी होते है.

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-Mradul tripathi

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