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कमलनाथ सरकार पर संकट ? 

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लोकसभा चुनाव 2019 के अंतर्गत मतदान के सातों चरण पूर्ण हो चुके हैं, अब इंतज़ार है तो सिर्फ मतगणना के दिन यानी 23 मई का उसी दिन पता चलेगा कि देश की राजनीति का ऊंट उस दिन किस करवट बैठेगा | नतीजों के पहले अंदाज़ा लगाने की कवायद यानी विभिन्न न्यूज़ चैनलों, अखबारों और न्यूज़ पोर्टल के एग्जिट पोल (Exit Poll 2019) आना शुरू हो चुके हैं |

गलत है एक्जिट पोल के आंकड़े, भाजपा नहीं बल्कि…

सभी चैनलों के एग्जिट पोल के नतीजों में एक ही बात सामने आ रही है कि नरेंद्र मोदी एक बार फिर से प्रधानमंत्री बनने वाले हैं| इस कारण जहां बीजेपी नेता बहुत खुश हैं तो वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार पर संकट (Kamal Nath government in problem ?) के बादल मंडराते दिखाई दे रहे हैं |

दरअसल, बीजेपी ने मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार (Kamal Nath government in problem ?) के अल्पमत में होने का दावा किया है | नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने  राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर सत्र बुलाने की मांग की (Gopal Bhargava Wrote Letter To Governor ) है| इसके बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में हड़कंप सा मच गया है|

दिल्ली में भाजपा की क्लीन स्वीप के बाद भी….

गोपाल भार्गव ने कहा (Gopal Bhargava Wrote Letter To Governor ), “जिस तरह से केंद्र और राज्य में बीजेपी को अपार जनसमर्थन मिल रहा है| कई कांग्रेस के विधायक कमलनाथ सरकार (Kamal Nath government in problem ?) से परेशान हो चुके हैं और बीजेपी के साथ आना चाहते हैं| उन्होंने कहा कि बीजेपी खरीद-फरोख्त नहीं करेगी, लेकिन कांग्रेस के ही विधायक अब उनकी सरकार के साथ नहीं हैं|”

गौरतलब है कि  लोकसभा चुनाव से पहले भी बीजेपी नेताओं द्वारा लगातार बयान दिया जा रहा था कि यदि बीजेपी की सरकार दोबारा बनती है तो मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार संकट में (Kamal Nath government in problem ?) आ जाएगी|

उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी| कुल 230 विधानसभा सीटों में से उसे 114 सीटें मिली थीं| हालांकि बहुमत के आंकड़े से वे दो सीटें दूर रह गई थीं| बहुमत के लिए 116 सीटें चाहिए थीं वहीं बीजेपी को 109 सीटें मिली थीं| इसके अलावा निर्दलीय को चार, बसपा को दो सीटें और सपा को एक सीट मिली थी|

Exit Poll 2019 में केवल मोदी का प्रमोशन!

चुनाव परिणाम के दिन ही सपा और बसपा ने कांग्रेस को समर्थन देने का ऐलान कर दिया था और निर्दलीय विधायक भी कांग्रेस के पक्ष में थे, इस प्रकार कांग्रेस ने अपने बहुमत का आंकड़ा साबित कर दिया था और कमलनाथ मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने थे|हालांकि सरकार बनने के बाद ही सपा और बसपा के विधायक कांग्रेस से नाराज़ नजर आ रहे थे, लेकिन उन्हें बार-बार कमलनाथ द्वारा शांत करवाया जा रहा था|

इसी दौरान बीजेपी के बड़े नेता भी आए दिन कमलनाथ सरकार को गिराने (Kamal Nath government in problem ?) का दावा करते नज़र आ रहे थे| कैलाश विजयवर्गीय ने लोकसभा चुनाव से पहले तो यहां तक कह दिया था कि जिस दिन ऊपर से आदेश होगा, उसी दिन सरकार गिरा देंगे| अब नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव की चिट्ठी से राजनीति फिर गर्म है|

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