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सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट ने मुहर लगाई, पार्षद ही चुनेंगे मेयर और अध्यक्ष

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2020 में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव से पहले मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में बड़ा बदलाव हुआ है। इसके बाद अब जनता सीधे महापौर को नहीं चुनेगी। इससे पहले तक जनता सीधे महापौर को चुनती थी। लेकिन इस फैसले के बाद अप्रत्यक्ष तरीके से महापौर और नगर निगम के सभापति का चुनाव होगा। अब महापौर का चुनाव सीधे न होकर, चुने गए पार्षदों के जरिए होगा। सरकार के इस फैंसले को याचिकाकर्ता (Petitioner) अनवर हुसैन ने दी थी उन्होंने दायर की गई याचिका (Petition) में कहा था कि सरकार द्वारा नगरीय निकाय एक्ट में किया गया संशोधन असंवैधानिक (Unconstitutional) है.

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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ये साबित नहीं कर सके कि राज्य सरकार(State government) द्वारा नगर निगम एक्ट(Municipal corporation act) में किया गया संशोधन असंवैधानिक है. सरकार ने तर्क दिया कि नगरीय निकायों में सभी सीटों में संविधान के अनुसार प्रत्यक्ष प्रणाली से निर्वाचन की व्यवस्था है, जबकि महापौर व अध्यक्ष के निर्वाचन के लिए नियम बनाने की जवाबदारी राज्य सरकार को सौंपी गई है. इसलिए राज्य सरकार द्वारा नगरीय निकाय एक्ट में किया गया संशोधन किसी भी तरीके से असंवैधानिक नहीं है और संविधान की धारा और नियमों के तहत ही पूरी प्रक्रिया को अपनाया गया है.

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जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) हाईकोर्ट ने तर्कों को सुनने के बाद पाया कि सरकार द्वारा नगरीय निकाय एक्ट में किया गया संशोधन न्याय संगत है, इस लिहाज से याचिका को खारिज कर दिया गया. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद यह साफ हो गया है कि मध्य प्रदेश में पार्षदों के जरिए ही महापौर और अध्यक्ष का निर्वाचन संपन्न होगा. हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के बाद प्रदेश सरकार को भी एक बड़ी राहत मिल गई है क्योंकि एक्ट में संशोधन को लेकर लगातार सियासत सरगर्म रही और खरीद-फरोख्त के आरोप भी लग रहे थे. हाईकोर्ट से फैसला आने के बाद ये साफ है कि नगरीय निकाय एक्ट में हुआ संशोधन सही था जिस पर हाईकोर्ट ने भी अपनी मुहर लगा दी है.

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-Mradul tripathi

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