दिग्विजयसिंह अपने एक बयान से फिर चर्चा में

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लोकसभा चुनाव में इस बार विवादित बयानों, आरोप-प्रत्यारोपों और अपने विपक्षियों की चुटकी लेने का दौर जारी है| काफी लम्बे समय के इंतज़ार के बाद मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में भाजपा और कांग्रेस ने प्रज्ञा ठाकुर (Pragya Thakur) और दिग्विजयसिंह (Digvijay Singh) के रूप में अपने प्रत्याशी तय किए थे | प्रत्याशियों के चयन के बाद से ही दोनों का एक-दूसरे पर बयानबाजी का दौर जारी है| अब फिर दिग्विजयसिंह ने एक बयान दिया है, जो चर्चा में आ गया है|

दरअसल, मालेगांव बम धमाकों की अभियुक्त रह चुकीं साध्वी प्रज्ञा बहुत ज़ोर-शोर से प्रचार भी कर रही हैं| अपने भड़काऊ भाषणों के लिए साध्वी प्रज्ञा को जाना जाता है| कुछ इसी अंदाज़ में वे अपने विरोधियों पर इस बार हमले कर रही हैं| चुनाव आयोग ने साध्वी प्रज्ञा के दिग्विजयसिंह के लिए, बाबरी मस्जिद के लिए और हेमंत करकरे पर दिए गए बयान पर स्वतः संज्ञान लेते हुए उनके प्रचार पर 72 घंटे का प्रतिबंध लगाया है|

इस प्रतिबंध पर दिग्विजयसिंह का कहना है कि वो चाहते हैं साध्वी प्रज्ञा और ज़्यादा बोलती रहें| उन्हें साध्वी प्रज्ञा की आवाज़ पसंद है | दिग्विजय सिंह कहते हैं, ”मैंने अभी चुनाव आयोग का आदेश नहीं देखा है| वैसे भी मैं तो चाहता हूं कि साध्वी प्रज्ञा जितना बोलें उतना ही अच्छा होगा क्योंकि उनके वक्तव्यों का अपना अलग ही लहज़ा होता है|”

भोपाल से भाजपा की उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर लगातार दिग्विजयसिंह पर हमलावर रही हैं| उन्होंने अपने एक भाषण में दिग्विजय को ‘आतंकवादी’ तक बोल दिया था, लेकिन दिग्विजय अभी तक साध्वी प्रज्ञा पर अधिक हमलावर नहीं हुए| अपने इस रुख पर वे कहते हैं, ”मैं कभी भी अपने प्रतिद्वंद्वी के ख़िलाफ़ कुछ नहीं बोलता| उन्हें मुझ पर जो आरोप लगाने हैं लगाएं, अगर वो अपने आरोपों के साथ प्रमाण भी देंगी तो मुझे और अधिक खुशी होगी|”

वो कहते हैं, ”अगर मैं आतंकवादी हूं तो मुझे गिरफ़्तार क्यों नहीं किया गया| अगर मेरे ख़िलाफ़ एक भी प्रमाण होता तो क्या मोदीजी मुझे छोड़ देते| पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुझे देशद्रोही कहा| ये लोग बिना प्रमाण की बातें करना जानते हैं|”

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आखिरकार आरएसएस की दिग्विजय से इतनी अधिक नाराज़गी क्यों है और उनके ख़िलाफ साध्वी प्रज्ञा को क्यों खड़ा किया गया है| इसके जवाब में दिग्विजय कहते हैं कि आरएसएस उनसे इस वजह से चिढ़ता है क्योंकि वो सनातन हिंदू हैं|

दिग्विजय कहते हैं, ”आज हमारे धर्मगुरू शंकराचार्यजी हैं, क्या किसी भी पीठ के शंकराचार्य का समर्थन विश्व हिंदू परिषद या आरएसएस या बीजेपी को है| ये लोग दरअसल कुटिल प्रयासों के ज़रिए धर्म का इस्तेमाल कर मठों और मंदिरों पर कब्ज़ा करना चाहते हैं| और यह सब सनातन धर्म की परंपराओं के विपरीत है|”

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