CM कमलनाथ के इस्तीफे से गिरी 15 महीनों की सरकार

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मध्यप्रदेश में सियासी घमासान (MP Political Crisis) के बीच आज 12 बजे सूबे के मुख्यमंत्री कमलनाथ (CM Kamal Nath) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस(Press Conference) आयोजित कर इस्तीफ़ा (Kamal Nath Resigns) देने की घोषणा कर दी। दोपहर 1 बजे मुख्यमंत्री कमलनाथ राज्यपाल लालजी टंडन (LaljiTandon) को अपना इस्तीफ़ा सौंपेंगे। बता दें कि कल सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court) में हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कमलनाथ सरकार को आज शाम 5 बजे तक बहुमत परीक्षण(Trust Vote) का आदेश दिया था। इसके बाद से ही यह अटकलें लगाईं जा रही थी कि कमलनाथ फ्लोर टेस्ट (Floor Test Live Update) से पहले ही अपना इस्तीफ़ा दे सकते हैं। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने कहा था कि पार्टी से 22 विधायकों के एक साथ इस्तीफ़ा देने की वजह से कमलनाथ सरकार के पास संख्याबल कम हो गया है और हमारे पास बहुमत का आंकड़ा नहीं है। आज प्रेस कॉन्फेंस में मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamal Nath Resigns) ने अपने इस्तीफ़ा की घोषणा कर दी। इस घोषणा के बाद राज्य में 15 महीनों की कांग्रेस सरकार गिर गई। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जंग से पहले अधूरे में ही अपने हथियार डाल दिए।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश, कमलनाथ साबित करें बहुमत

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में साल 2018 में विधानसभा चुनाव हुए थे। राज्य की 230 सीटों पर 28 नवंबर 2018 को वोट डाले गए थे। राज्य में 75.05% वोटिंग हुई थी। 11 दिसंबर 2018 को मतगणना की गई जिसमें कांग्रेस को जीत हासिल हुई। चुनाव नतीजे सामने आने के बाद कांग्रेस को 114, भाजपा को 109, बहुजन समाज पार्टी को 2, समाजवादी पार्टी को 1 और निर्दलीय को 4 सीटों पर जीत मिली। 15 साल बाद कांग्रेस को मिली बड़ी जीत के बाद भी वह बहुमत के जादूई आंकड़े 116 से दो सीट दूर रह गई। हालांकि भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला लेकिन 15 साल के बाद कांग्रेस को जीत हासिल हुई। गठबंधन से कांग्रेस ने राज्य में सरकार बनाई। 15 साल के बाद राज्य की सत्ता में काबिज होने वाली कमलनाथ सरकार सिर्फ 15 महीने ही सत्ता संभाल पाई। पार्टी से खफा चल रहे महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी को अपना त्यागपत्र सौंप दिया और भाजपा में शामिल हो गए। सिंधिया के साथ 22 अन्य विधयकों ने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया और कमलनाथ सरकार अस्थिर हो गई। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पंहुचा और सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट का आदेश दे दिया, लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बहुमत परीक्षण से पहले त्यागपत्र दे दिया।

जानिए, मध्यप्रदेश के 16 बागी विधायकों का क्या होगा?

गौरतलब है कि 22 विधायकों के इस्तीफे से कांग्रेस गठबंधन के पास मात्र 99 विधायक बचे हैं, जबकि बहुमत के लिए 104 का आंकड़ा चाहिए। जबकि भारतीय जनता पार्टी के पास 106 विधायक हैं मतलब बहुमत से 2 ज्यादा। यही वजह है कि भाजपा जल्द से जल्द. फ्लोर टेस्ट की मांग कर रही थी। मुख्यमंत्री कमलनाथ सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले तक सरकार के पास बहुमत होने का दावा कर रहे थे। लेकिन जब उनकी सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह भी बागी विधायकों को मानाने और उन्हें वापस लाने में फेल हो गए तब सीएम कमलनाथ ने फ्लोर टेस्ट से पहले ही अपना इस्तीफा सौंप दिया। बता दें सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाने से पहले विधानसभा स्पीकर को गुरुवार को जमकर फटकार लगाई थी। दरअसल स्पीकर ने मात्र 6 विधायकों का इस्तीफा स्वीकारा किया था और बाकी 16 विधायकों का नहीं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट स्पीकर से काफी खफा हुआ था। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद देर शाम को विधानसभा स्पीकर ने सभी 16 विधायकों के इस्तीफे को भी स्वीकार कर लिया और कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई।

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Prabhat Jain

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