अब गिरेगी कमलनाथ सरकार ?

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लोकसभा चुनाव के बाद जब से एग्जिट पोल आने शुरू हुए थे, तब से मप्र की कमलनाथ सरकार की नींद उड़ी हुई थी | भाजपा के पक्ष में नतीजे आने के बाद जहां नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने राज्यपाल को पत्र लिख विधानसभा सत्र बुलाने की बात कही थी, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कमलनाथ को इस्तीफ़ा देने तक की सलाह दे डाली थी| अब गुमानसिंह डामोर के सांसद बन जाने के बाद खाली हुई झाबुआ विधानसभा सीट (BJP Congress Ready For Jhabua By Election) कमलनाथ के लिए या तो संजीवनी का काम करेगी या ज़हर बन जाएगी|

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गौरतलब है कि आगामी 6 माह के भीतर झाबुआ में होने वाले विधानसभा के चुनाव (BJP Congress Ready For Jhabua By Election) परिणाम कमलनाथ सरकार के स्थायित्व का निर्धारण करेंगे| यदि यह चुनाव भाजपा जीत गई तो कमलनाथ सरकार को अपना बहुमत साबित करने में काफी परेशानी आ सकती है, यहां तक कि मप्र में कांग्रेस सरकार गिर भी सकती है | वहीं यदि कांग्रेस के पक्ष में परिणाम आया तो कमलनाथ सरकार आसानी से बहुमत हासिल कर लेगी | इसका अर्थ यह हुआ कि झाबुआ विधानसभा  सीट के परिणाम प्रदेश की कमलनाथ सरकार के जीवन-मरण का निर्धारण करेंगे |

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उल्लेखनीय है कि झाबुआ एक बार फिर प्रदेश की राजनीति का  एक नया केंद्र बन गया है| झाबुआ में आने वाले 6 महीने कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए मुश्किल वाले  होंगे क्योंकि झाबुआ विधानसभा सीट के लिए होने वाले उपचुनाव दोनों पार्टियों के लिए एक तरह के लिए लिटमस टेस्ट होगा| इस चुनाव का नतीजा जिसके पक्ष में रहेगा , वह प्रदेश में मजबूती पाएगा| यही कारण है कि दोनों पार्टियां चुनाव तक झाबुआ में पूरे दमखम से अपनी ताकत दिखाएंगे|

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कांग्रेस की सरकार को बनाए रखने और अपनी जमीनी ताकत साबित करने के लिए  यह एक मौका होगा  और यदि यह चुनाव भारतीय जनता पार्टी जीत जाती है तो कांग्रेस को अपना बहुमत साबित करने के लिए एडी  चोटी का जोर लगाना पड़ेगा|

उल्लेखनीय है कि भाजपा 2018 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के बागी जेवियर मेड़ा के कारण जीत गई थी,  भाजपा ने   गुमानसिंह डामोर को पहले विधानसभा और फिर लोकसभा का चुनाव लड़ाया और वे दोनों ही जीत गए| यदि कोई व्यक्ति दोनों सदनों में  चुना जाता है तो उसे 14 दिन के अंदर किसी एक सदन से अपनी सदस्यता छोड़ना पड़ती है| इसी कारण भाजपा को डामोर को विधानसभा से इस्तीफा दिलाना पड़ा, जिससे प्रदेश  सरकार में उसके विधायकों की संख्या 108 रह गई है| अब यदि विधानसभा में बहुमत हासिल करने का सवाल उठा तो 229 विधायकों के बीच  कांग्रेस अपने 115 विधायकों के साथ बहुमत हासिल कर लेगी | झाबुआ विधानसभा का चुनाव परिणाम कमलनाथ सरकार के लिए जीवन-मरण का सबब बनेगा |

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