आकाश को भोपाल न्यायालय से भी जमानत नहीं मिल पाई

0

इंदौर के विधायक आकाश विजयवर्गीय (Akash Vijayvargiya) बुधवार दोपहर से सरकारी कार्य में बाधा के आरोपी हैं पुलिस एमजी रोड ने उन्हें कई धाराओं में आरोपित कर न्यायालय में पेश किया था न्यायालय ने उन्हें जेल भेज दिया था। आज सुबह विधायक और पूर्व मंत्री विश्वास सारंग (Vishvas Sarang) ने वकीलों के साथ भोपाल कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की थी । हाल ही में खबर सामने आई है कि आकाश को भोपाल न्यायालय से भी जमानत नहीं मिल पाई है|

कैलाश विजयवर्गीय से डरते हैं शिवराज!

दरअसल, पुलिस द्वारा न्यायालय को केस डायरी नहीं भेजे जाने के कारण भोपाल न्यायालय से जमानत नहीं मिल पाई है| इससे लग रहा है कि पुलिस भी दबाव में है|गौरतलब है कि कल गुरुवार को जमानत के प्रयास हुए लेकिन माननीय न्यायाधीश ने अधिकार क्षेत्र का हवाला देकर कल जमानत याचिका रद्द कर दी थी|

इंदौर बैटकांड : आकाश ने जिसे मारा बल्ला, वह अधिकारी ICU में भर्ती

उल्लेखनीय है कि भाजपा के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) के पुत्र आकाश विजयवर्गीय (Akash Vijayvargiya) ने सरेआम नगर निगम के कर्मचारी की बैट से पिटाई की थी। इस मामले में अब बड़ी खबर सामने आई है। विधायक की बैट से मार खाने वाले कमर्चारी की हालत खराब हो गई है, उसे आईसीयू में भर्ती कराया गया है। फिलहाल आकाश जेल में बंद हैं। अब आकाश को भोपाल न्यायालय से भी जमानत नहीं मिल पाई है है। लगता है अब विजयवर्गीय की मुश्किलें बढ़ गई है।

इंदौर जेल में आकाश विजयवर्गीय बुधवार यानी बैटकांड के बाद से ही बंद हैं। उनकी जमानत के लिए उसी दिन प्रयास किया गया, लेकिन तब जमानत खारिज कर दी गई। अभी तक यह कयास लगाए जा रहे थे कि आकाश को आज (शुक्रवार ) या कल तक जमानत मिल जाएगी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया| अब निगम के अधिकारी धीरेंद्र सिंह बायस (46) के आईसीयू में भर्ती होने के बाद और जमानत निरस्त होने पर अब मामला और उलझ सकता है ।

पोस्टर पर निकला आकाश और निगम का झगड़ा

गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा आज इंदौर में आकाश के समर्थन में आयोजित धरना-आंदोलन के पूर्व ही फिर मामले में एक बार नया मोड़ आ गया है। भाजपा ने जहां पूरे राजबाड़ा क्षेत्र में आकाश को सेल्यूट (Salute Akashji) के बोर्ड लगाए थे तो निगम ने धरना शुरू होने के दो घंटे पहले ही यह बोर्ड निकालकर जब्त कर लिए और अपने अटालाघर में डलवा दिए। ऐसा समझा जाता है कि निगम की इस कार्रवाई से निगम और भाजपा के बीच चल रहे संघर्ष में एक नया मोड़ आ जाएगा।
Share.