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भाजपा कार्यकर्ता पुलिस के कार्यों में कर रहे हैं हस्तक्षेप

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मप्र के रतलाम जिले में पुलिस और भाजपा युवा मोर्चा पदाधिकारी एक बार फिर आमने-सामने हो गए। इस बार मामला औद्योगिक क्षेत्र थाने का है। सूत्रों के मुताबिक किसी मामले को लेकर अखिल भारतीय  विद्यार्थी परिषद  के कुछ कार्यकर्ता थाने पहुंचे। वहां उनके साथ एक आरक्षक ने कथित तौर पर गाली-गलौज  और अभद्रता की। इस पर उन्होंने फोन करके अपने साथियों को थाने बुला लिया (Police Beat ABVP Worker)।

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 आरोप है कि  इस पर थाने में मौजूद सीएसपी ने कार्यकर्ताओं को खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज करवा दिया। इस भागमभाग के बीच दो कार्यकर्ता कृष्णा और हार्दिक को पुलिस ने थाने में कपड़े उतरवाकर मारा (BJP workers are interfering in the works of police) । बीते दिनों में ये चौथा मौका है जब भाजपा से जुड़े संगठन के कार्यकर्ता और पुलिस में झड़प हुई है। जबकि पुलिस का कहना है कि  आरक्षक के साथ कार्यकर्ताओं ने झूमाझटकी की  और गला पकड़ लिया (Police Beat ABVP Worker )।

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लेकिन इस प्रकरण में राजनीतिक उबाल तब आ गया जब पूर्व मंत्री और विधायक कार्यकर्ताओं के समर्थन में थाने पहुंच गए।  हिम्मत कोठारी खुद विधायक और मंत्री रहते हुए पुलिस के नियमित कार्यो में हस्तक्षेप किया करते थे। लेकिन कल उन्हें फिर थाने में देखकर लगा की उनकी ये आदत अब भी गई नहीं  है (BJP workers are interfering in the works of police) । भाजपा से जुड़े संगठनों के कार्यकर्ता बेलगाम हो चुके हैं । भाजपा के शासन में ये लोग  पुलिस से भी अपनी मनमानी करवा लेते थे।लेकिन राज्य में सत्ता परिवर्तन होते ही पुलिस भी सक्रिय हो गयी।

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गौरव तिवारी जैसे ईमानदार पुलिस कप्तान के नेतृत्व में पुलिस भी अब बिना किसी दबाव के इन अराजक तत्वों पर कार्यवाही कर रही है (BJP workers are interfering in the works of police) ।  लेकिन ये बात शहर के “पूर्व नेताओं ” को समझ नहीं आ रही है। हिम्मत कोठारी जैसे नेता बिना मामले को समझे पुलिस पर अनर्गल आरोप मढ़ रहे हैं। थाने पहुंचकर पुलिस के कार्य में  हस्तक्षेप करना कोठारी जैसे वृद्ध  नेताओं को शोभा नहीं देता है। जब शहर की जनता ने ही उन्हें घर बैठा दिया है, तो उन्हें बेवजह की नेतागिरी से दूर ही रहना चाहिये। गौरव तिवारी के नेतृत्व में पुलिस शहर में लगातार चौकस बनी हुई है।

जनता भी पुलिस की कार्यप्रणाली से खुश है, लेकिन कोठारी जैसे नेताओं को ये हज़म नहीं  हो रहा है (BJP workers are interfering in the works of police)। जब से गौरव तिवारी शहर के एसपी के रूप में आए  हैं, तब से सारे गैर-कानूनी धंधे स्वतः बंद हो गए हैं । हर अपराधी और गुंडे के मन में पुलिस के प्रति खौफ पैदा हुआ है, लेकिन इस तरह की ‘नेतागिरी’ से पुलिस पर दबाव बनाना सही नहीं  है। पुलिस के मनोबल को तोड़ने वाली राजनीति शहर में नही होना चाहिए । अगर कोई गलत करता है तो पुलिस कार्रवाई होना ही चाहिए । अपनी राजनीति चमकाने के लिए पुलिस के कार्यो में हस्तक्षेप करने से नेताओं को बाज़ आना चाहिए ।

 

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