जानिए मप्र. में घोटालेबाज़ 4.5 लाख टॉयलेट की रकम कैसे खा गए?

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कहते हैं कि स्वस्थ (4.5 Lacs Paper Toilets) रहना है तो सफाई (Swachh Bharat Abhiyan) यानी स्वच्छता बेहद जरूरी है। हालांकि भाजपा सरकार ने इस बात को समझते हुए देशभर में स्वच्छ भारत प्रोग्राम (Swachh Bharat Abhiyan)  की शुरुआत की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने खुद हाथ में झाड़ू उठाई और सफाई अभियान की शुरुआत की। इसके बाद देश को खुले में शौच से मुक्त कराने के लिए जगह-जगह सरकारी टॉयलेट (Government toilets) बनाने की कवायद शुरू की गई जो काफी सफल रही। स्वच्छ भारत अभियान के तहत मध्यप्रदेश का इंदौर शहर लगातार चौथी बार नंबर 1 रहा। स्वच्छ भारत अभियान में जहां मध्यप्रदेश के शहर बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं वहीं सरकारी टॉयलेट (Government toilets) बनाने के मामले में मध्यप्रदेश से एक बड़ी गड़बड़ सामने आई है। मध्यप्रदेश में कुल 4.5 लाख टॉयलेट बनाए जाने थे जिनकी कुल कीमत 540 करोड़ रुपए निर्धारित थी लेकिन क्या वाकई ये टॉयलेट बन चुके हैं? आपको बता दें कि आंकड़ों ने यह तो घोषित कर दिया है कि भारत खुले में शौच से लगभग पूरी तरह मुक्त हो चूका है लेकिन सच बात तो यह है कि मध्यप्रदेश में जो 4.5 टॉयलेट (4.5 Lacs Paper Toilets) बनाए जाने थे वे कभी बने ही नहीं है, यह सभी सिर्फ हवाई किले थे। आपको यह जानकार और भी हैरानी होगी कि इन टॉयलेट को बनाए जाने की रकम भी पास हो चुकी है और ये रिपोर्ट भी दी जा चुकी है कि टॉयलेट बनाए जा चुके हैं।

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अब सरकारी योजना के लिए जो पैसा पास किया गया था वह भी सरकार के पास पहुंच गया और दस्तावेजों में टॉयलेट (4.5 Lacs Paper Toilets) भी बन गए हैं लेकिन यह सिर्फ कागजों में ही है असल में नहीं। अब सवाल पैदा होता है कि यदि इतना बड़ा घपला हुआ तो फिर सिर्फ दस्तावेजों में जो टॉयलेट बने हैं उनकी मैपिंग कैसे की गई? मतलब बने हुए टॉयलेट्स को कैसे दिखाया गया? तो इससे एक और बात निकलकर सामने आयी है कि जिन्होंने इस पूरे मामले में धांधली की, घपला किया उन्होंने जियो-मैंपिंग भी गड़बड़ी की और अलग-अलग स्थानों पर टॉयलेट्स को बना हुआ दिखा दिया गया। मतलब सिर्फ दस्तावेजों और रिपोर्ट्स में बने टॉयलेट जिन पर पैसा भी पास हो चुका वे असलियत में नहीं बनाए गए लेकिन इन्हें बनाए जाने का कार्य पूर्ण हो चुका है और निर्धारित संख्या में टॉयलेट बना दिए गए हैं। अब इस पूरे घपले की पोल कुछ दिन पहले खुली जब बैतूल जिले की लक्कड़जाम पंचायत ने इस मामले की शिकायत कर दी। ग्राम पंचायत ने अधिकारियों को बताया कि गांव में सरकारी टॉयलेट (4.5 Lacs Paper Toilets) बने ही नहीं हैं जबकि रिपोर्ट में इन्हें बना हुआ दिखाया गया है। अधिकारियों तक बात पहुंची तो जांच और पूछताछ शुरू हुई। जब जांच और पूछताछ शुरू हुई तो टॉयलेट बनवाने के नाम पर हुई धांधली की पोल उजागर हो गई। शुरूआती जांच में ही 4 लाभार्थी ऐसे सामने आए जिनके नाम पर स्वच्छ भारत योजना के तहत टॉयलेट्स बनवाने का पैसा पास हो चुका है लेकिन उन्हें इस बात की जानकारी तक नहीं है। मतलब चारों लाभार्थियों को नहीं पता कि उनके नाम पर पैसा पास हो चुका है, और सिर्फ पैसा ही नहीं पास हुआ बल्कि टॉयलेट भी बन गया।

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इस बात की जब जांच करवाई गई तब खुलासा हुआ कि टॉयलेट (4.5 Lacs Paper Toilets) बनाने के लिए निर्धारित समय 2018 तक था, मतलब साल 2012 से लेकर साल 2018 के बीच सारे शौचालय बन जाने थे जो कागजों में बन भी चुके हैं लेकिन इसकी असलियत तो कुछ और ही है। वहीं पैसा पास करवाने के लिए जिन टॉयलेट्स के फोटोग्राफ इस्तेलाम किए गए थे वे कहीं और के टॉयलेट्स के फोटो थे। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) मध्यप्रदेश के डिप्टी डायरेक्टर ‘अजीत तिवारी’ (Ajit Tiwari) ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा “2012 में हमने एक सर्वे कराया था। उसमें पता चला था कि प्रदेश में गरीबी रेखा से ऊपर जीने वाले 62 लाख परिवार ऐसे थे, जिनके घर में टॉयलेट था ही नहीं। फिर हमने ये शौचालय बनवाने का काम शुरू कराया. 21 हजार वॉलंटियर की मदद से सर्वे कराया तो 4.5 लाख शौचालय (4.5 Lacs Paper Toilets) मिसिंग निकले।” जिस मध्यप्रदेश का इंदौर शहर लगातार 4 बार स्वच्छता में नंबर 1 पर रहा, वही मध्यप्रदेश स्वच्छता अभियान के मामले में धांधली कर रहा है। यह धांधली उजागर होने के बाद क्या अब मिसिंग टॉयलेट बनाए जाएंगे या नहीं, या अब और कई नई धांधली की जाएगी।

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Prabhat Jain

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