Video : मध्य प्रदेश में रेप के 32 आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई, लेकिन लटकाया नहीं

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आमतौर पर जब भी कोई जघन्य अपराध होता है, तो जनता अपराधी को कड़ी से कड़ी सज़ा देने की मांग करती है। यदि सज़ा की बात की जाए तो इसमें सबसे बड़ी है फांसी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बच्चियों से रेप (rape cases) करने और उनकी हत्या करने जैसे जघन्य मामलों में अब तक मध्यप्रदेश में अलग-अलग कोर्ट 32 अपराधियों को फांसी की सज़ा सुना चुकी हैं, लेकिन बावजूद इसके ये अपराधी अभी तक फांसी के फंदे पर नहीं लटक पाए हैं।

मध्यप्रदेश में बच्चियों से दुष्कर्म करने वाले आरोपियों को फांसी की सज़ा दिलवाने में कई लोक अभियोजकों ने प्रयास किए हैं। बीते दो वर्षों यानि 2018 और 2019 में प्रदेश का लोक अभियोजन विभाग देश में अव्वल रहा है और इसके द्वारा 32 आरोपियों को फांसी की सज़ा दिलवाई गई है।

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क्यों नहीं हुई सज़ा-

कई मामलों में कोर्ट से आरोपियों को सज़ा तो सुना दी गई लेकिन बावजूद उन्हें फांसी इसलिए भी नहीं दी जा सकी, क्योंकि उनके पास अपील के बहुत सारे विकल्प हैं। इनमें कई आरोपियों ने राष्ट्रपति को भी अर्जी भेजी है, लेकिन उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई।

दूसरे राज्यों में वीसी (VC) से हुई गवाही-

कई मामलों में लोक अभियोजकों ने आरोपियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने के लिए विभिन्न दूसरे माध्यमों का भी सहारा लिया। एक मामले में जब दुष्कर्म (rape cases) पीड़िता की तबीयत ज्यादा खराब हुई तो उसे उपचार के लिए दिल्ली भेजा गया। तब लोक अभियोजकों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग (VC) के ज़रिए पीड़िता के बयान करवाए और आरोपियों को फांसी की सज़ा दिलवाई।

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32 Accused In Rape Cases Sentenced To Death But Not Hanged

32 Accused In Rape Cases Sentenced To Death But Not Hanged

कोलकाता में हुई थी अंतिम फांसी

दुष्कर्म (rape cases) कर उसकी हत्या करने वाले आरोपी धनंजय को कोलकाता के अलीपुर की जेल में अंतिम फांसी दी गई थी। दुष्कर्म के मामले में यह अंतिम फांसी ही थी, जो देश की किसी जेल में दी गई थी। इसके बाद से देशभर में 4 लाख से अधिक रेप के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन किसी को भी फांसी नहीं हुई।

क्यों होती है फांसी में देरी-

यदि किसी आरोपी को फांसी की सज़ा दी जाती है, तो इसके बावजूद भी उसे मुकम्मल करने में देरी होती है। इसके कई कारण हैं-

– जैसे आरोपी को यदि जिला कोर्ट से सज़ा होती है, तो वह हाई कोर्ट में अपील कर सकता है।

– हाईकोर्ट से भी यदि आरोपी की सज़ा बरकरार रखी जाती है, तो वह सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर देता है।

-सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद वह एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पुनर्विचार याचिका दायर कर सकता है।

– यदि यह याचिका खारिज भी हो जाती है, तो फिर वह राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेज सकता है।

– राष्ट्रपति के यहां से दया याचिका खारिज होने के बाद आरोपी पुनः सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दायर करता है। यह याचिका उस स्थिती में लगाई जाती है, जब आरोपी की अर्जी सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति दोनों ही खारिज कर दें। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट यह याचिका स्वीकार करता है।

32 Accused In Rape Cases Sentenced To Death But Not Hanged

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ऐसे में लगातार दुष्कर्म के मामले सामने आने और उनमें सज़ा होने के बाद भी आरोपियों को फांसी पर नहीं लटकाए जाने को लेकर अभिभाषकों का भी यही कहना है कि आरोपियों को जल्द से जल्द फांसी दी जानी चाहिए। इसके फैसले के लिए भी समयसीमा तय की जानी चाहिए, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके।

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Prabhat Jain

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