शिवराज अचानक क्यों पहुंचे दिग्विजय के घर

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मध्यप्रदेश की राजनीति: आमतौर पर राजनीति में अक्सर यह देखने में आता है कि लोग अपने नेताओं के लिए आपस में भिड़ जाते हैं, लेकिन राजनीति में इससे इतर भी तस्वीर कहीं देखने को मिलती है। राजनीति के बारे में वैसे भी कहा जाता है कि यहां समाज के सामने ज़रूर पांचों अंगुलियां अलग होती हैं, लेकिन बंद कमरे में वे सभी एक हो जाती हैं।

कुछ ऐसा ही इन दिनों मध्यप्रदेश की राजनीति में देखने को मिल रहा है। यहां राजनीतिक शिष्टाचार की मिसाल रोज देखने को मिल रही है। चुनाव के दौरान जिन नेताओं ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए थे, चुनाव संपन्न होने के बाद अब वे ही नेता एक-दूसरे से गलबहियां कर रहे हैं और खूब ठहाके भी लगा रहे हैं। नेता इस बात की मिसाल पेश कर रहे हैं कि राजधर्म को इस तरह से भी निभाया जा सकता है।

प्रदेश में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद ही सियासत की तस्वीर भी अब आकर्षक लगने लगी है। सबसे पहले भोपाल में कांग्रेस विधायक आरिफ अकील पूर्व मुख्यमंत्री के बंगले पर पहुंचे और उनकी खैर खबर पूछी।

इसके बाद कमलनाथ के शपथग्रहण समारोह में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से कुछ इस तरह से मिले कि जैसे दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि मित्र  हों।

वहीं कमलनाथ की शपथ के बाद प्रदेश के सामने जो तस्वीर आई, वह भी कुछ इसी तरह की थी। इसमें सिंधिया, शिवराज और कमलनाथ तीनों ने ही हाथ पकड़कर एक मजबूत राजनीति का संदेश दिया।

राजनीति में एक अभूतपूर्व मिसाल इस मंगलवार भी देखने को मिली। जब दो पूर्व मुख्यमंत्री आपस में मिले, बल्कि इसके साथ ही उन्होंने आम लोगों के लिए भी एक बड़ा संदेश छोड़ा।

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मंगलवार सुबह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के निवास पर पहुंचे और उनसे मुलाकात की। इस दौरान दोनों की दोस्ती एक बार फिर सार्वजनिक रूप से जाहिर हुई। वहीं शाम होते-होते पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह के घर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान भी जा पहुंचे। यहां दिग्विजयसिंह ने शिवराज का जोरदार स्वागत किया। वहीं उनके पुत्र जयवर्धन सिंह ने उनके पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया।

कुल मिलाकर राजनीति को आम लोग जिस चश्मे से देखते हैं, उसकी असली कहानी कुछ ऐसी ही होती है। यदि देश में राजनीति को प्रतिपादित किया जाए तो किसी भी तरह के मनमुटाव को छोड़कर विकास की राहें बेहद ही आसान हो सकती हैं। वहीं आम लोगों को भी अपनी आंखों से सियासत की इस दुर्लभ तस्वीर का दीद करना चाहिए। ताकि समाज में एक सकारात्मक संदेश जा सके।

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शिवराज को भाजपा की ना

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