SC/ST एक्ट : सु्प्रीम कोर्ट का फैसला बदलेगी सरकार

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एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम में बदलाव के बाद दलित समुदाय की नाराज़गी को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार अधिनियम को अपने पुराने और मूल स्वरूप में लाने की तैयारी कर रही है| अधिनियम में बदलाव को लेकर बुधवार को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी भी मिल गई| अब सरकार संशोधन के साथ पुराने कानून को लागू करने के लिए विधेयक ला रही है|

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 20 मार्च को अपने फैसले में इस कानून के प्रावधानों में कई बदलाव करते हुए ऐसे मामले में आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी| कोर्ट के फैसले के विरोध में दलित संगठनों ने 9 अगस्त को भारत बंद का आह्वान किया था| वहीं भाजपा के एससी-एसटी सांसद एवं मंत्री ने भी इस फैसले की कड़ी आलोचना की थी| अब बदले जा रहे अधिनियम के अनुसार एफआर्इआर दर्ज होने के तुरंत बाद आरोपी को गिरफ्तार किया जाएगा| जाहिर तौर पर सरकार ने 9 अगस्त के प्रस्तावित दलित आंदोलन का आधार भी खत्म कर दिया है|

जानकारी के अनुसार, दलित अत्याचार निवारण कानून के मूल प्रावधानों को बहाल करने के उद्देश्य के साथ अगले सप्ताह एससी-एसटी संशोधन विधेयक 2018 लाया जाएगा और वह आसानी से पारित भी हो जाएगा क्योंकि दलित मतों को देखते हुए कोई इसका विरोध करने वाला नहीं है|

अधिनियम में हो रहे बदलाव की पुष्टि केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने की है| उन्होंने बताया कि संशोधन के बाद अधिनियम का अनुच्छेद 18 अब 18ए हो जाएगा, इसे आने के बाद कानून के प्रावधान और सख्त हो जाएंगे| गौरतलब है कि नया विधेयक पास होने के बाद धारा 438 के प्रावधान निष्क्रिय हो जाएंगे| इसके अनुसार आरोपी की गिरफ्तारी तुरंत नहीं हो सकती| इसमें जांच के बाद ही गिरफ्तारी के प्रावधान है| अभी गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत का प्रावधान भी है|एससी-एसटी संशोधन के बाद यह धारा ही समाप्त हो जाएगी| अब नए कानून को अनुसूचित जाति-जनजाति (उत्पीड़न निरोधक) संशोधित कानून-2018 कहा जाएगा|

आरक्षण का आधार आर्थिक हो

SC-ST वर्ग को सुप्रीम कोर्ट की सौगात

SC-ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा….

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