सरकार के छह साल और मिशन मुद्दा भटकाव

0

देश कोरोना काल से गुजर रहा है और इसी बीच बीजेपी की पीएम मोदी की अगुवाई वाली सरकार ने अपने कार्यकाल के छह साल पुरे कर लिए. छह साल तक सरकार खुद ही अपनी पीठ थपथपाती रही और उसके सिपहसलार तारीफों के पुल बांधते रहे. सही भी है. और कोई तारीफ करें न करें अपने लोग तो करें. उनकी अपनी नैतिक जिम्मेदारी और जरा सी मज़बूरी भी है. विपक्ष निस्तोनाबुत है और मीडिया …खेर छोडो …..

ऐसे में इस छह सालों का जवाब कौन मांगे. कइयो की तो हिम्मत ही नही पड़ती. डर है कही देश द्रोही न करार दे .लेकिन किसी को तो सवाल करने होंगे. ज्यादा दूर न जाते हुए क्यों न बात इसी साल या फिर आज से ही शुरू की जाये. कोरोना के दौरान सब कुछ जनता, पुलिस और डाक्टर के हवाले है और पीएम केयर का फंड में बेशुमार दौलत आई उसका पता नहीं क्या होगा, चीन कभी भी सरकार के बस का नही रहा और अब नेपाल भी गुर्राने लगा है. कभी विपक्ष में बैठ कर चीन को लाल आँख दिखाने का दावा करने वाले न जाने क्यों उसी चीन का सीमा पर बढ़ता अतिक्रमण सहन कर रहे है, जबकि रोजगार का जरिया ‘पकौड़ा’ बेचने वाले का ठेला सड़क अतिक्रमण के नाम पर हटा कर नियमो के सख्ती से पालन का हवाला देकर सु -शासन के ढोल पिटे जा रहे है. आत्मनिर्भर भारत कभी थाली पिट रहा है, तो कभी मोमबत्ती जला रहा है, बाद में पता चला मोमबत्ती तो बीजेपी के स्थापना दिवस की जली थी. खैर यह भी अच्छे दिन ही है ऐसा मान कर चले तो भी मुख्य मुद्दे कही खो गए है या गुम कर दिए गए है. रोजगार, गरीबी, किसान, महिला तो छोडो रोटी, कपडा और मकान ही नही सुलझा है अब तक.

लेकिन दावा  है कि जो 70 बरस में नहीं हुआ वह छह सालों में हुआ. अब सरकार ने कहा है तो सच ही होगा ऐसा मीडिया का एक बड़ा भाग या यूँ कहे की सबसे बड़ा भाग मानता है. और आज कल जो मीडिया कहे सो सच. अब मीडिया ऐसा सच क्यों बोल रही है यह तो वो ही जाने. लेकिन आज देश का सबसे बड़ा और कडवा सच यह है कि न तो गुजरात मॉडल कही है न राष्ट्रवाद का वह मुद्दा जिसके जरिये चुनाव जीते गए, सीमा की सुरक्षा के विशेषज्ञ और सेना के पूर्व अधिकारीयों की माने तो 1999 के बाद पहली बार चीन इतना आगे आया है, अहमदाबाद उच्च न्यायालय ने सिविल अस्पताल की बदहाली को सरेआम करते हुए गुजरात मॉडल और आयुष्मान भारत की पोल पहले ही खोल दी है. हाल ही में PPE किट के लिए मारामारी कम नही हुई है. ऐसे में भी सिर्फ एक काम जारी है, मुद्दा भटकाव मिशन . मुलभुत आवश्यकताओं से झुंझ रही आम जनता क्या जीडीपी और क्या विदेश निति और क्या सीमा सुरक्षा पर गौर करेगी.

लेकिन आज देश का सबसे बड़ा और कडवा सच यह है कि न तो गुजरात मॉडल कही है न राष्ट्रवाद का वह मुद्दा जिसके जरिये चुनाव जीते गए, सीमा की सुरक्षा के विशेषज्ञ और सेना के पूर्व अधिकारीयों की माने तो 1999 के बाद पहली बार चीन इतना आगे आया है, अहमदाबाद उच्च न्यायालय ने सिविल अस्पताल की बदहाली को सरेआम करते हुए गुजरात मॉडल और आयुष्मान भारत की पोल पहले ही खोल दी है. हाल ही में PPE किट के लिए मारामारी कम नही हुई है. ऐसे में भी सिर्फ एक काम जारी है, मुद्दा भटकाव मिशन . मुलभुत आवश्यकताओं से झुंझ रही आम जनता क्या जीडीपी और क्या विदेश निति और क्या सीमा सुरक्षा पर गौर करेगी. सबसे काबिल और वाक् पटुता में दक्ष मंत्री-संत्री सब बचाव कर लेंगे और दोष विपक्ष पर डाल देंगे और मीडिया उसे इस तरह से पेश करेगी की सब सच ही है, जबकि निति आयोग की उस सिफारिश को कभी मीडिया ने तव्वज्जो नही दी जिसमे उसने कहा था की सरकार बीते 70 साल को कोसना बंद करें और अपने काम गिनवाये. बहरहाल छह साल की कामयाबी मुबारक और मुबारक हो गरीबी, बरोजगारी, किसान आत्महत्या, बलात्कार, सीमा सुरक्षा के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे वही घिसे पिटे मुद्दे और मुद्दों का देश ……लेकिन सवाल होंगे और जवाब तो माँगा जायेगा जो एक न एक दिन देना भी होगा ….

 

Share.