मोमो चैलेंज पर सरकार ने जारी की एडवायज़री

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मोमो चैलेंज के कारण बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं के बाद केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। सरकार लोगों को इस गेम से दूर रखना चाहती है। इसके लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने एडवायज़री जारी की है। एडवायज़री में कहा है कि सभी परिजन अपने बच्चों की ऑनलाइन और सोशल मीडिया की गतिविधियों पर नज़र रखें। सरकार ने कुछ संकेत भी जारी किए हैं, जिनके आधार पर परिजन को पता चल सके कि उनका बच्चा मोमो चैलेंज गेम तो नहीं खेल रहा है। सरकार ने माता-पिता को सचेत रहने को कहा है।

गतिविधियों पर रखें नज़र

सरकार ने कहा है कि इस बात की जानकारी रखें कि कहीं उनका बच्चा मोमो चैलेंज गेम तो नहीं खेल रहा है। माता-पिता को बच्चे के स्कूल जाकर उसकी रिपोर्ट लेनी चाहिए, उसके शिक्षक से भी बच्चे के व्यवहार के बारे में पूछना चाहिए। बच्चे के कंप्यूटर में उसकी ऑनलाइन गतिविधियों को मॉनिटर करने वाला एक सॉफ्टवेयर भी इंस्टॉल करके रखें।

लक्षणों के बारे में बताया

एडवायज़री में ऐसे संकेतों के बारे में बताया गया है, जिससे पता लग सकता है कि उनका बच्चा इस तरह के खेल का शिकार तो नहीं। दोस्तों और परिवार से कटकर रहना, उदास रहना, शरीर पर गहरे कटे निशान से इसके संकेत मिल सकते हैं। गेम से बच्चे को बचाने के लिए दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं।

आत्महत्या की चुनौती

मोमो चैलेंज गेम में एक डरावनी, मोटी आंखों वाली खतरनाक महिला की फोटो फोन पर आती है। इस गेम में खुद को नुकसान पहुंचाने के साथ ही यह धीरे-धीरे खतरनाक होता जाता है। आखिर में इसमें आत्महत्या की चुनौती दी जाती है।

बच्चे कर रहे खुदकुशी

अर्जेंटीना में इस चैलेंज से पहली बार 12 वर्ष की लड़की की मौत हुई थी। उसने इसका पूरा वीडियो बनाया और आत्महत्या कर ली। 20 अगस्त को पश्चिम बंगाल दार्जिलिंग में मनीष सरकी (18) और अदिति गोयल (26) ने भी खुदकुशी कर ली थी। पुलिस का कहना था कि दोनों ने ऑनलाइन गेम में मिले टास्क के कारण यह कदम उठाया है।

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