कोरोना संकट में पैदल चलते हुए मध्यप्रदेश के शख्स की मौत की दर्दनाक कहानी

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Migrant Worker Walking From Delhi To M.P. Due To Corona Lockdown Death Experience:

अंतिम शब्द ‘‘मेरे सीने में दर्द हो रहा है, लेने आ सकते हो तो आ जाओ…
कोरोना संकट में पैदल चलते हुए मध्यप्रदेश के शख्स की मौत की दर्दनाक कहानी
‘‘मैं काफी थक गया हूं। मेरे सीने में दर्द हो रहा है। अगर लेने आ सकते हो तो आ जाओ।‘‘

ये शब्द उस शख्स की आखिरी कॉल के हैं जिनकी मौत दिल्ली से पैदल चलकर मध्यप्रदेश जाते हुए आगरा के पास हो गई थी। मुरैना के रहने वाले रणवीर सिंह नाम दिल्ली में एक डिलिवरी मैन के रूप में काम किया करते थे। लॉकडाउन के बाद दिल्ली में खाने-पीने और रहने से जुड़ी दिक्कतें सामने आने के बाद उन्होंने अपने गाँव जाने का फैसला किया था। कोई साधन न मिलने की वजह से रणवीर सिंह ने पैदल पैदल ही अपने गाँव की ओर बढ़ना शुरू कर दिया, लेकिन शायद रणवीर को भी नहीं पता होगा कि यह सफर उनका अंतिम सफर होगा।

मौत की रात क्या हुआ था?
जब दिल्ली में लाॅक डाउन हुआ तो रणवीर सिंह ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर घर जाने का फैसला किया था। बाहर देखा तो ना बसें थी और ना ही कोई साधन था। बस सामने खड़ी थी तो मजबूरी। रणवीर को लगा कि जैसे दूसरे लोग जा रहे हैं वे भी कभी ना कभी अपने घर पहुंच ही जाएंगे। और इसी कारण उन्होंने अपने साथियों के साथ पैदल ही चलने का फैसला किया।
रणवीर दिल्ली से निकले और फरीदाबाद पहुंचे। रात के साढ़े नौ बजे थे। उन्होंने अपनी बहन पिंकी से बात की।
पिंकी ने उस दिन अचानक ही अपने भाई को फोन मिला दिया था। जब अपने भाई के पैदल घर आने की बात सुनी तो ये सुनकर उसे भी काफी अजीब लगा…।‘
पिंकी बताती हैं कि भइया से बात करने के बाद मैं अपनी दवा खाकर सो गई। सुबह जब उठी तो मैंने सबसे पहले लगभग पाँच बजे के आसपास भइया को फोन किया।
‘‘इस कॉल पर उन्होंने कहा कि उनके सीने में दर्द हो रहा है। पिंकी ने कहा कि आप कहीं बैठ जाइए और मैं तब तक किसी को फोन करती हूँ..। ये पिंकी की अंतिम बातचीत थी।

रणवीर सिंह के साथ रास्ते में क्या हुआ?
रणवीर दिल्ली से मथुरा के रास्ते होते-होते सुबह सुबह आगरा तक पहुंच चुके थे। लेकिन तब तक शरीर काफी थक चुका था। हाथ-पैर जवाब दे चुके थे। रास्ते में कुछ किलोमीटर के लिए ट्रैक्टर में लिफ्ट मिली, लेकिन वह काफी नहीं थी। इस सफर मंे रणवीर सिंह के साथ उम्र के कई युवा, बुजुर्ग और बच्चे शामिल थे।
दिल्ली के एक रेस्तरां में डिलिवरी मैन के रूप में रणवीर के साथ उनके एक रिश्तेदार अरविंद भी रहते थे। अरविंद को रणवीर सिंह ने आखिरी बार कॉल किया था। लेकिन अरविंद उस पूरी रात रणवीर सिंह के संपर्क में रहे।
अरविंद को एक ट्रक में जगह मिल गई थी जबकि उनके जीजाजी पैदल चलकर आ रहे थे।
अरविंद के अनुसार- मेरी उनसे रात में बात हुई थी। रात में ही थकान की बात कर रहे थे। लेकिन कोरोना के डर की वजह से किसी ने उनकी मदद नहीं की। वे पैदल चलते रहे और आगरा तक आते-आते उनकी हालत खराब हो गई।

मौत के आखिरी घंटे…
नेशनल हाईवे नंबर 2। सुबह के साढ़े छह बजे। चलती हुई भीड़ में एक शख्स अचानक गश्त खाकर नीचे गिर पड़ता है। यह रणवीर ही थे।
मरने से पहले रणवीर सिंह ने अपने रिश्तेदार अरविंद को फोन करके मदद की गुहार लगाई थी।
आखिरी शब्द थे- मेरे सीने में दर्द हो रहा है, मुझे लेने आ सकते हो तो आ जाओ।‘‘
अरविंद ने भी जवाब दिया- 100 नंबर डायल करो…किसी की मदद लो…लेकिन इसके बाद उनकी आवाज नहीं आई।‘‘
कॉल के तकरीबन आठ मिनट बाद जब अरविंद ने ट्रक से उतरकर फिर एक कॉल की तो किसी और ने फोन उठाकर बताया कि उनकी हालत गंभीर है। इसके बाद उनकी मौत हो गई।

मौत के बाद क्या?
रणवीर सिंह की मौत के बाद से पत्नी ममता और उनके तीनों बच्चे सदमे से जूझ रहे हैं। रणवीर के पिता भी जल्द ही गुजर गए थे। तीन बच्चे हैं, लेकिन घर में अब कोई कमाने वाला नहीं बचा है। घर की चारदीवारी खिंचवाने के लिए भी डेढ़ लाख रुपए कर्ज लिया था। अब आगे क्या होगा यह किसी को पता नहीं।
कोरोना के दंश के जहां पूरे देश में हालात बिगड़े हुए हैं, वहां उन करोड़ों लोगांे में से यह थी रणवीर की कहानी(Corona Lockdown Death Experience)….

-Rahul Kumar Tiwari

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