सुप्रीम कोर्ट के वे फैसले, जो इस साल चर्चित रहे

0

वर्ष 2018 विदाई ले रहा है। नए साल के स्वागत के लिए लोग पूरी तरह तैयार हैं। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने कई ऐतिहासिक फैसले (Supreme Court’s Top 10 Decisions Of 2018 ) लिए हैं। इन फैसलों को समाज में बड़े परिवर्तन की ओर देखा जा रहा है। आइए जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के ऐसे फैसलों के बारे में, जिनका सीधा सरोकार जनता से है।

List Of Supreme Court’s Top 10 Decisions Of 2018 : 

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश

न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय बेंच ने 28 सितंबर को इस पर फैसला सुनाया था। बेंच ने सबरीमाला मंदिर में हर आयु की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी। अब तक मंदिर में 10 से लेकर 50 वर्ष तक की महिलाओं के प्रवेश पर रोक थी।

आधार की अनिवार्यता खत्म

आधार कार्ड की वैधता को सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर को खत्म कर दिया। न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व में पांच सदस्यीय बेंच ने आधार की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा, परंतु कई सेवाओं और मामलों के लिए इसकी अनिवार्यता को खत्म कर दिया। बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि आधार यूजीसी,सीबीएसई और निफ्ट जैसी संस्थाएं आधार नहीं मांग सकती। वहीं स्कूल, मोबाइल कंपनिया, निजी कंपनियां आधार नहीं मांग सकती हैं। कोर्ट ने आधार को बैंक खाते से लिंक करने के फैसले को भी रद्द कर दिया।

समलैंगिकता अपराध पर फैसला

कोर्ट ने 6 सितंबर को समलैंगिकता को अपराध मानने वाली आईपीसी की धारा 377 की वैधानिकता पर फैसला सुनाया था। कोर्ट के समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर रखा था।

विवाह के बाद संबंध अपराध नहीं

न्यायाधीश दीपक मिश्रा, रोहिंटन नरीमन, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ और इंदु मल्होत्रा की बेंच ने एडल्टरी को अपराध करार देने वाली आईपीसी की धारा 497 को रद्द करने का फैसला सुनाया था। बेंच ने 158 साल पुराने कानून को खत्म कर दिया। फैसला में कहा कि शादी के विघटन सहित नागरिक मुद्दों के लिए व्यभिचार आधार हो सकता है, लेकिन यह आपराधिक कृत्य नहीं हो सकता।

मस्जिद में नमाज़

सुप्रीम कोर्ट ने 27 सितंबर को इस्लाम से जुड़ी महत्वपूर्ण परंपरा पर फैसला सुनाया था। फैसले में कहा कि इस्लाम धर्म में मस्जिद में नमाज पढ़ना अनिवार्य नहीं है और न ही यह इस्लाम का अभिन्न हिस्सा है। कोर्ट ने 1994 के इस्माइल फारूकी मामले पर यह फैसला सुनाया था।

दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर फैसला 25 सितंबर को दिया। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल चार्जशीट के आधार पर जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई नहीं जा सकती। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि पार्टियां वेबसाइट पर दागी नेताओं का रिकॉर्ड डालें ताकि मतदाता अपना फैसला खुद कर सकें।

दहेज उत्पीड़न पर फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 14 सितंबर को दहेज उत्पीड़नों के मामले में बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने फैसले में पति के परिवार के मिलने वाले सेफगार्ड को खत्म कर दिया। कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के मामले में पति की तुरंत गिरफ्तारी को मंजूरी दी थी। कोर्ट का कहना था कि पीड़ित महिला की सुरक्षा के लिए इस प्रकार का निर्णय काफी ज़रूरी है।

इन भारतीय खिलाड़ियों ने 2018 में लिया संन्यास

इन घटनाओं का रहा सालभर बोलबाला…

2018 में देश के नेताओं के 10 विवादित बयान…

रहें हर खबर से अपडेट, ‘टैलेंटेड इंडिया’ के साथ| आपको यहां मिलेंगी सभी विषयों की खबरें, सबसे पहले| अपने मोबाइल पर खबरें पाने के लिए आज ही डाउनलोड करें Download Hindi News App और रहें अपडेट| ‘टैलेंटेड इंडिया’ की ख़बरों को फेसबुक पर पाने के लिए पेज लाइक करें – Talented India News

Share.