भाजपा-शिवसेना फिर आमने-सामने

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संसद में हुए हंगामे के बाद अब भाजपा और शिवसेना एक बार फिर आमने-सामने हैं। लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर शिवसेना के रुख से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह नाराज हैं। मुंबई में रविवार को भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठक में उन्होंने 2019 का लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने की तैयारी करने को कहा। इसके लिए संगठन मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि लोकसभा सीटों पर जल्द ही प्रभारी नियुक्त किए जाएंगे। सभी सीटों पर ऐसी तैयारी होनी चाहिए कि शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के एक साथ लड़ने पर भी भाजपा ही जीते।

वहीं, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी मुखपत्र ‘सामना’ को दिए इंटरव्यू में कहा कि वे मोदी के सपनों के लिए नहीं, आम आदमी के सपनों लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिवसेना किसी एक पार्टी की दोस्त नहीं है। एनडीए में भाजपा के साथी  शिवसेना ने पहले अविश्वास प्रस्ताव के विरोध में वोट करने का व्हिप जारी किया था, लेकिन बाद में वापस ले लिया। इसके बाद पार्टी ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा में भी नहीं लिया था। शिवसेना ने राहुल गांधी के लोकसभा में दिए भाषण की भी तारीफ की थी। इसके बाद से भाजपा में शिवसेना के प्रति नाराज़गी साफ़ नज़र आ रही है।

अमित शाह ने इस बैठक में कार्यकर्ताओं से कहा कि वे गठबंधन की चिंता छोड़ें और चुनाव की तैयारी करें। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को ’23 प्वाइंट वर्किंग स्ट्रैटेजी’ के तहत काम करने को कहा। साथ ही पार्टी को मजबूत करने के साथ नए वोटर्स को जोड़ने पर जोर दिया और स्थानीय नेताओं से वोटर्स के नियमित फीडबैक लेने को कहा।

वहीं उद्धव ठाकरे ने इंटरव्यू में कहा, “हमने केंद्र सरकार की किसी भूमिका या नीति का विरोध देश या जनता के हित के लिए किया। विरोधी दल क्या कर रहे हैं, इसे लोगों ने देखा है। हम सरकार के साथ हैं, लेकिन हमने कभी भी छिपकर कोई बात नहीं की। जो कुछ भी किया वह खुलेआम किया।”

महाराष्ट्र में शिवसेना और भाजपा की अलग-अलग राह आने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है| किसानों और आम लोगों के मुद्दे को लेकर शिवसेना भाजपा को परेशानी में डाल सकती है|

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