विधानसभा में भर्तियां सवालों के घेरे में

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मध्यप्रदेश विधानसभा में तृतीय वर्ग के 30 पदों की भर्ती सवालों के घेरे में आ गई है। इसके लिए विधानसभा ने न कोई विज्ञापन निकाला और न ही कोई परीक्षा आयोजित की गई। विधानसभा उपाध्यक्ष राजेंद्र कुमार सिंह ने इस सम्बन्ध में अध्यक्ष सीताशरण शर्मा को पत्र लिखकर विधानसभा भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि इस तरह की गतिविधियों से विधानसभा की छवि खराब हो रही है।

विधानसभा भर्ती प्रक्रिया में गोपनीयता

डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह ने अपने पत्र में लिखा है कि विधानसभा सचिवालय द्वारा तृतीय श्रेणी के रिक्त पदों की भर्तीं प्रक्रिया की कार्यवाही गोपनीय ढंग से की जा रही है। इस सम्बन्ध में न तो विज्ञापन जारी किया गया, और न कोई चयन प्रक्रिया की जा रही है और ना ही रोजगार समाचार में सूचना दी गई है। कुछ चिंहित जिलों में ही जानकारी दी गई है।

योग्य उम्मीदवार वंचित

उन्होंने लिखा है इस तरह भर्ती प्रक्रिया से विधानसभा जैसी संवैधानिक संस्था की छवि पर खराब असर हो रहा है। जिससे प्रदेश के बेरोजगार युवाओं में आक्रोश बढ़ेगा। इस तरह की विधानसभा भर्ती प्रक्रिया से योग्य उम्मीदवारों की सेवाएं लेने से सचिवालय वंचित रहेगा। ऐसी भर्ती प्रक्रिया से कोई बेरोजगार न्यायालय की शरण में अथवा लोकायुक्त आदि संस्थाओं में शिकायत कर सकता है।

सचिवालय का तर्क

विधानसभा सचिवालय कहा कहना है कि विज्ञापन देते तो आवेदकों की संख्या हजारों में आती, इसलिए प्रदेश के तमाम रोजगार दफ्तरों से ही पात्रता के अनुसार योग्य लोगों के आवेदन बुला लिए गए। इनकी संख्या भी एक हजार से अधिक हो गई है।

भर्ती के लिए योग्यता

विधानसभा सचिवालय के अनुसार तृतीय वर्ग के पद के लिए योग्यता ग्रेजुएशन के साथ कंप्यूटर प्रोफिशिएंसी सर्टिफिकेशन टेस्ट (सीपीसीटी) पास रखी गई है। वर्तमान समय में कई ऐसे युवा हैं, जो रोजगार दफ्तरों में पंजीयन कराने नहीं जाते, वे सीधे तौर पर भर्ती से वंचित हो जाते हैं।

 योग्य उम्मीदवार के आवेदन मांगे

विधानसभा प्रमुख सचिव एपी सिंह ने कहा कि विधानसभा भर्ती प्रक्रिया में भर्तियां रोजगार दफ्तरों के माध्यम से आवेदन बुलाकर ही की जाती रही हैं। विज्ञापन करते तो संख्या काफी हो जाती। इस बार तो पूरे प्रदेश के रोजगार कार्यालयों से योग्य लोगों के आवेदन मांगे हैं।

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