‘चेतक ब्रिज’ से झांकते…

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नए रतलाम को पुराने रतलाम से जोड़ने वाला शहर का व्यस्ततम चेतक ब्रिज अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है। इस ब्रिज के बीच में से सड़क उखड़ चुकी है और सरिये बाहर झांकने लगे हैं, जिससे ये किसी बड़ी दुर्घटना को निमंत्रण दे रहे हैं। चेतक ब्रिज का एक सिरा राम मंदिर पर है तो दूसरा सिरा सैलाना बस स्टैंड पर निकलता है।

गौरतलब है कि इस ब्रिज का पुनर्निर्माण हुए 1 वर्ष भी पूर्ण नहीं हुआ है। निर्माण के दौरान ये दावे किए गए थे कि अब सालों तक इसके मेंटेनेंस की जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन सरकारी दावों की पोल ये तस्वीरें खुद खोल रही हैं। सुबह और शाम के समय यहां यातायात का अत्यधिक दबाव रहता है, लेकिन सड़क अभी से ही जगह-जगह से उखड़ने लगी है। एक जगह इस ब्रिज की रेलिंग भी टूटी है, लेकिन जिम्मेदार कुम्भकर्णी नींद सोए हैं।

बाजना बस स्टैंड क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के विरोध में पहुंचे वरिष्ठ नेता, जो वहां माला जपने और विरोध के नाम पर नौटंकी करने पहुंचे थे, वे इस मुद्दे सहित शहर की बदहाल सड़कों पर कुछ कहने को तैयार नहीं हैं। सीवर लाइन के नाम पर शहर की सड़कें खोद डाली गई और अब चेतक ब्रिज के सरिये बाहर निकल आए हैं। न तो नगर निगम, न रेलवे और न ही लोक निर्माण विभाग इधर ध्यान देने को तैयार है।

कुछ समय पहले इसी पुल पर हादसे में एक किशोर की मौत हो गई थी। यदि सड़क के बीचों-बीच से बाहर झांकते सरियों की मरम्मत जल्दी नहीं कराई गई तो कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है। यदि ऐसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी निगम प्रशासन लेगा, लोक निर्माण विभाग या फिर रेलवे यह तय होना चाहिए। पुल के सरिये कहीं इस निर्माण में हुए भ्रष्टाचार की वजह से तो नहीं है तो यह भी जनता जानना चाहती है।

चुनावी साल में जनता से सीधे जुड़े मसलों को कोई सुनने वाला नहीं है तो बाकी सालों में क्या होता होगा, इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है| रतलाम की महापौर डॉ.सुनीता यार्दे एक उम्दा चिकित्सक हैं, लेकिन जनता से जुड़ने में वे पूरी तरह असफल रही है। राजनीति शायद उनका क्षेत्र नहीं है, लेकिन जनता की दी जिम्मेदारी से वे भाग नहीं सकती। इस घोर लापरवाही पर जिम्मेदारों को जल्द ही ध्यान देना चाहिए और पुल की मरम्मत  करवानी चाहिए।

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