बच्चियों से दुष्कर्म पर मृत्युदंड, लोकसभा की मंजूरी

1

देश में बढ़ते दुष्कर्म के मामलों पर लगाम लगाने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है| सोमवार को 12 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म पर फांसी की सज़ा देने संबंधित महत्वपूर्ण विधेयक को लोकसभा ने मंजूरी दे दी है| इसके तहत 16 साल से कम उम्र की लड़कियों से दुष्कर्म करने  वाले को सख्त सज़ा का प्रावधान किया गया है| लोकसभा ने विधेयक पर कुछ सदस्यों को संशोधनों को खारिज़ करते हुए दंड विधि संशोधन विधेयक 2018 को ध्वनि मत से पारित कर दिया| 

इस दौरान गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू ने जवाब देते हुए कहा कि महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विधेयक में सभी आवश्यक प्रावधान किए गए हैं| देश में बलात्कार के विशेषकर 16 वर्ष तथा 12 वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं के साथ दुष्कर्म के काफी मामले सामने आ रहे हैं इसलिए अपराधियों के लिए कठोर सज़ा के प्रावधान जरूरी हैं|

उन्होंने आगे बताया कि 16 वर्ष से कम उम्र की बालिका के साथ बलात्कार करने पर न्यूनतम सज़ा दस वर्ष से बढ़ाकर 20 वर्ष सश्रम कारावास किया गया है| इस मामले में अधिकतम सजा ताउम्र कैद और जुर्माना होगा| इसी तरह से 12 वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं के साथ दुष्कर्म के दोषियों को भी कम से कम 20 वर्ष सश्रम कारावास की सजा का प्रावधान है| इन मामलों में मृत्युदंड भी दिया जा सकता है|

वहीं 16 वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म की स्थिति में न्यूनतम सज़ा ताउम्र सश्रम कारावास और जुर्माना होगी| 12 वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म की स्थिति में न्यूनतम सजा ताउम्र कारावास और जुर्माना होगी| इन मामलों में भी मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है| कुकर्म के अन्य मामलों में भी न्यूनतम सजा सात वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष की गई है|

इसी के साथ रिजिजू आगे बताया कि दुष्कर्म के सभी मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी|

Share.