किडनी क्यों निकाली पूछा तो थमा दिया बिल

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मध्यप्रदेश के इंदौर के एक नामी अस्पताल द्वारा किसान की किडनी चोरी किए जाने का मामला साफ़ होता जा रहा है| अस्पताल प्रबंधन ने मामले को छिपाने के कई प्रयास किए, लेकिन सच्चाई सामने आती चली गई| जब मामला सामने आया तो अस्पताल प्रबंधन ने अपनी गलती मानने के बजाय पीड़ित को बिल थमा दिया|

मामला शहर के भंडारी अस्पताल का है| अस्पताल में उज्जैन जिले की महिदपुर तहसील के ग्राम तारोट में रहने वाले बुजुर्ग किसान अमरलाल बारिया वर्ष 2011 में पथरी का ऑपरेशन करवाने पहुंचा था| इस दौरान अस्पताल के डॉक्टरों ने उसकी किडनी चोरी कर ली| ऑपरेशन के बाद जब किसान को पता चला कि उसकी किडनी निकाल ली गई है तो उसने डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन से इसका जवाब मांगा| पहले तो डॉक्टर मोहित भंडारी ने इसके लिए मना किया, लेकिन बाद में उसने किडनी निकालने की बात को स्वीकारते हुए मरीज को तीन हज़ार का बिल थमा दिया|

मरीज ने बताया कि उसका ऑपरेशन डॉ.मोहित भंडारी ने ही किया था| ऑपरेशन के बाद जब पेटदर्द होने लगा तो दूसरे अस्पताल में जांच करवाई, जहां पता चला कि एक किडनी गायब है| चोरी का खुलासा होने के बाद अस्पताल प्रबंधन अमरलाल को डराने-धमकाने लगा कि इस बात कि जानकारी किसी को न दें| इतना ही नहीं उन्होंने किसान को लालच भी दिया| डॉक्टर मोहित के पिता और व्यापमं घोटाले के आरोपी डॉ.विनोद भंडारी ने किसान से कहा कि वे उनके बेटों को अपने कॉलेज में नौकरी देंगे, एक प्लॉट और पूरे परिवार का आजीवन मुफ्त इलाज करवाएंगे, लेकिन किसान ने किसी की बात नहीं मानी| वकील की फीस नहीं भर पाने के कारण गरीब किसान डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा नहीं लड़ रहा है| किडनी नहीं होने के कारण वह खेतों में भी काम नहीं कर पा रहा है|

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