अध्यात्म और सामाजिक विषयों पर रखे विचार

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देश की जानी-मानी कथा वाचिका और भागवतवक्ता जया किशोरीजी इन दिनों इंदौर में अपनी कथा के लिए पधारी हुई हैं| इंदौर के मरीमाता चौराहे पर होने वाली इस कथा को लेकर उन्होंने शुक्रवार को मीडिया से चर्चा की| जया किशोरीजी ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए आध्यात्मिक जीवन को लेकर विचार रखे| उन्होंने बताया कि महज 6 वर्ष की उम्र से ही उन्हें भगवान कृष्ण के प्रति आकर्षण पैदा हुआ था और तभी से वे भगवान के भजन गाते हुए आध्यात्मिक राह पर आगे बढ़ीं|

उन्होंने अपने अध्ययन के बारे में बताया कि हाल ही में वे स्नातक हो चुकी हैं| साथ ही उनका भागवत के क्षेत्र में कार्य निरंतर जारी है| उन्होंने कहा कि पहले वे ‘नानीबाई का मायरा’ गाती थीं, लेकिन लोगों के आग्रह पर उन्होंने भागवत कथा करना शुरू किया और यह कार्य आज भी निरंतर जारी है| इस कार्य से प्राप्त होने वाली राशि को वे नारायण सेवा संस्थान जयपुर को दान करती हैं, जिससे दिव्यांग बालक-बालिकाओं की सेवा होती है|

किशोरीजी ने कहा कि भागवत वाचन से उन्हें आत्मिक सुख की प्राप्ति होती है| बच्चों के करियर के विषय में उन्होंने कहा कि बच्चे जिस कार्य में रुचि रखते हैं, उन्हें वही कार्य करने दिया जाना चाहिए| उन्होंने परिवार में कम होते मूल्यों, आज की पीढ़ी में कम होते संस्कारों और समय के भाव को जिम्मेदार बताया|

पुरुषों की सोच में हो बदलाव

बालिकाओं को लेकर अख़बार में छपे अपने बयान पर सफाई देते हुए जया  किशोरी ने कहा कि उन्होंने कभी ऐसा नहीं कहा कि बेटियों को अपने कपड़ों का ध्यान रखना चाहिए| उन्होंने कहा कि बेटियों ही नहीं बल्कि बुरी घटनाएं तो छोटी-छोटी बच्चियों के साथ भी होती हैं| इसके लिए समाज में सभी को अपनी मानसिकता बदलनी चाहिए|

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