जिम्मेदारी से बचने की तैयारी में निगम

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इंदौर के सरवटे बस स्टैंड पर गिरी होटल के मामले में अब नगर निगम आनन-फानन कार्रवाई करने की तैयारी में है| नगर निगम ने इस घटना के बाद शहर के ऐसे भवनों को नोटिस जारी किए, जो खतरनाक हैं| नगर निगम द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर अब सवाल भी उठने लगे हैं कि जब शहर में ये भवन सालों से हैं तो फिर हादसे के बाद ही निगम को इनकी याद क्यों आई|

नगर निगम ने सोमवार को सरवटे बस स्टैंड क्षेत्र में 9 खतरनाक भवन चिन्हित किए और जल्दी से इन्हें तोड़ने के नोटिस भी दे दिए। निगम ने वहां के रहवासियों और व्यवसायियों से कहा कि ये भवन अत्यंत जर्जर हैं। ये रहने लायक नहीं हैं इसलिए तुरंत खाली करें। ऐसे भवनों में बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना होता है, जिनसे कभी भी जनहानि हो सकती है।

शहर में कई ऐसे बड़े भवन हैं, जो जर्जर हालत में हैं और ये मकान ऐसे क्षेत्रों में हैं, जहां यदि कोई घटना होती है तो ये कम से कम  50 से 100 लोगों को अपनी जद में ले लेंगे| ऐसे में नगर निगम भी इन मकानों को नोटिस जारी कर अपने ऊपर लगने वाले आरोपों को ख़ारिज करने में लगा है, लेकिन बावजूद इसके जरूरत है कि निगम एक रणनीति बनाकर ऐसे मकानों को शहर से मुक्त करवाए|

खुद पकड़ाया होटल मालिक, पुलिस बोली हमने पकड़ा

दो दिन से फरार एमएस होटल के मालिक को पुलिस ने सोमवार शाम गिरफ्तार कर लिया| होटल मालिक ने परिस्थिति को देखते हुए खुद आत्मसमर्पण किया, लेकिन पुलिस का कहना है कि उसे घेराबंदी कर पकड़ा गया| उस पर 10,000 रुपए का इनाम घोषित था| पुलिस उपमहानिरीक्षक हरिनारायणचारी मिश्र ने बताया कि एमएस होटल ढहने के मामले में इसके मालिक शंकर परियानी (55) को खातीवाला टैंक इलाके में उसके घर के पास से गिरफ्तार किया गया| परियानी के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) और धारा 308 (आपराधिक मानव वध करने का प्रयत्न) के तहत मामला दर्ज किया गया है|

हादसों के इंतजार में निगम

इंदौर के सरवटे बस स्टैंड पर हुए हादसे के बाद अभी भी शहर में ऐसी सैकड़ों पुरानी इमारतें खड़ी हैं, जिन्हें निगम के भवन अधिकारियों और पार्षद की अनुशंसा पर अल्टर-रिपेयर के नाम पर नए निर्माण की खुली छूट मिली है| गर्डर- फर्शी के पुराने मकानों पर निर्माणों को मंजूरी दी जा रही है|

विधायक उषा ठाकुर के क्षेत्र में ही वार्ड 56 के सिख मोहल्ला और लोधी मोहल्ला की संकरी गली के अंदर ‘वीआम द बैग’ नाम से बैग का कारोबार करने वाले बोहरा समाज के एक व्यक्ति के पुराने मकान को गर्डर फर्शियों पर ही नए निर्माण की स्वीकृति अल्टर-रिपेयर के नाम पर दे दी गई है| इसकी शिकायत आसपास के रहवासियों ने निगम के अधिकारियों, सीएम हेल्पलाइन और पार्षद दीपिका कमलेश नाचन से भी की थी, लेकिन कोई हल नहीं निकला| लोग पार्षद पति से शिकायत करते हैं तो वे अधिकारियों को भ्रष्टाचारी बताते हैं और अधिकारियों को शिकायत की जाती है तो अधिकारी भवनों की शिकायत के लिए बनी समिति को दोषी ठहराते हैं| ऐसे में निगम के जनप्रतिनिधि और अधिकारियों के आरोप-प्रत्यारोप और मिलीभगत का फायदा दूसरे लोग उठा ले जाते हैं|

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