तलत अज़ीज़ की शानदार गायिकी, बेहतरीन साउंड और महा खराब संचालन

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इंदौर यूं तो फनकारों और बेहद ही सुधी श्रोताओं का शहर है। ऐसे में शहर में अपनी प्रस्तुति देने आए तलत अज़ीज़ (singer Talat Aziz) साहब को भी यह बात समझ में आ गई थी कि सुनने वाले कैसे हैं। कई बार उन्होंने मंच से इस बात का ज़िक्र भी किया कि वे किन लोगों के बीच गा रहे हैं। तलत़ अज़ीज़ (singer Talat Aziz) ने अपनी गायिकी में कई रागों को शुमार किया और श्रोताओं ने इनका आनंद भी लिया। आते ही उन्होंने ‘यमन कल्याण’ में अलाप लिया। इसके बाद उनकी गायिकी में दरबारी, भैरवी और सरस्वती जैसे रागों की झलक भी दिखी।

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Singer Talat Aziz Excellent Performance But Poor Arrangement Indore

Singer Talat Aziz

कुछ गीत ऐसे हैं जो तलत अज़ीज़ (Singer Talat Aziz) की पहचान बन चुके हैं। इनमें ‘फिर छिड़ी रात बात फूलों की’ सुनकर श्रोताओं को मज़ा आ गया। जैसे ‘बाज़ार’ फिल्म में तलत अज़ीज़ की आवाज़ थी, उम्र के इस दौर में आकर भी गायिकी में वही गहराई हमें नज़र आती है। इसके अलावा उन्होंने ‘आज जाने की ज़िद ना करो’, खूबसूरत हैं आंखें तेरी जैसी कई ग़ज़लें, नज़्म और कता से शाम को नवाज़ा। साथी कलाकारों में भी समझदारी की कोई कमीं नहीं थी। सभी कलाकारों ने एक से बढ़कर एक शास्त्रीय रागों और तालों से शाम को बांधे रखा। साउंड की जिम्मेदारी भी शहर की नामी सांउड कंपनी के पास थी। पांडाल में तो साउंड शानदार था, लेकिन कहीं-कहीं कान भी फाड़ रहा था। वहीं स्टेज के माॅनिटर में ठीक आवाज़ नहीं आने के कारण कलाकार परेशानी से दो चार होते रहे।

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Singer Talat Aziz Excellent Performance But Poor Arrangement Indore

Singer Talat Aziz

बेहद खराब संचालन, प्रशासन की थू-थू करा गया…

बात यदि संचालन की हो तो सभी इंतज़ामों में इसका ख्याल रखना भूल गया। जिम्मेदारी एक शासकीय लेक्चरर के कंधों पर थीं, जो कि अमूमन प्रशासन के हर कार्यक्रम में हमें नज़र आती हैं और शायद उनके इसी अनुभव को देखकर प्रशासन उन्हें हर बार मौका देता है। लेकिन इस बार उन्होंने जैसे ही मंच पर अपने वाले तलत अज़ीज़ को उन्होंने तलज अजीज (singer Talat Aziz) कहा, तो इसमें उनकी नहीं प्रशासन की बेइज़्ज़ती हुई। उर्दू में नुकते यानि बिंदू का काफी ज़्यादा ख़्याल रखा जाता है, और  यह बात नीचे बैठे हुए अधिकांश लोग जानते थे, इसलिए उनके मुंह से यह शब्द किसी कांटे की तरह लग रहे थे। उन्होंने कई ऐसे शब्द कहे, जिसका तलफ़्फ़ुस बच्चे भी जानते होंगे, जैसे -गज़ल को उन्होंने गजल कहा। ‘मज़ा आया’ कि जगह उन्होंने लोगों से पूछा मजा आया। बहरहाल प्रशासन के अधिकारी भी इस बात से वाकिफ होंगे, लेकिन उन्हें लगा होगा कि इतने बड़े आयोजन में इतना ध्यान कोई नहीं देगा। यहां पूरे इंदौर की सामूहिक बेइज़्ज़ती गज़ल गायिकी के इतने बड़े उस्ताद के सामने हुई।

बहरहाल जिला प्रशासन ने महफिल को बेहद ही शानदार तरीके से सजाया था। वैसे भी शहर में बहुत कम ऐसे आयोजन होते हैं, जिनमें इतनी संख्या में अधिकारी बैठे हों। यहां अधिकारी आए भी और आखिर तक बैठे भी।

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