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फर्जी कंपनी Ways2Capital का किया SEBI ने लाइसेंस निरस्त

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आज दिन भर चुनाव के नतीजों को लेकर काफी उठापठक रही। एक तरफ देश ने जहां नरेंद्र मोदी को एकतरफा विजयश्री दिलाई है वहीं सेबी ने भी आज निवेशकों के हित में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इंदौर में पंजीकृत एक कंपनी ‘वेज़ टू केपिटल’ (ways2capital) पर अब तक कि सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए ‘सेबी’ ने इस कंपनी का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। सेबी ने इसके साथ ही कंपनी के प्रमोटर्स, डायरेक्टर, कर्मचारियों और कई पूर्व कर्मचारियों पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगा दिए हैं।

सेबी ने दिए फर्जी एडवायजरी कंपनियों पर कार्रवाई के निर्देश

इस कंपनी के खिलाफ सेबी को साल 2015 से लगातार शिकायतें मिल रही थी। 31 मार्च 19 तक कुल 488 शिकायतें सेबी के पास रजिस्टर्ड हो चुकी थी। शहर के विजयनगर पुलिस थाने में कंपनी के खिलाफ ठगी का शिकार हुए कई निवेशकों ने शिकायत भी दर्ज कराई थी। इसके बाद जब सेबी ने कंपनी से इस मामले में उचित कार्रवाई करने को कहा तो कंपनी ने इसे हल्के में लिया और मामले में ढिलाई बरती। कंपनी की तरफ से बरती गई ढिलाई के बाद सेबी को ही कार्रवाई करनी पड़ी। और सेबी ने कंपनी पर अपना शिकंजा कस लिया।

सेबी ने एक और कंपनी पर लगाया प्रतिबंध

हाइब्रो मार्केट रिसर्च प्रा. लि. के नाम से रजिस्टर्ड इस कंपनी का सारा कारोबार ways2capital के नाम से किया जाता है। यह कंपनी तरह-तरह के दावे कर अपने निवेशकों को ललचाती थी। कंपनी ने कई निवेशकों से प्रॉफिट से ज्यादा खुद की फीस वसूल ली। इतना ही नही कंपनी ने तो अपने निवेशकों के डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, डीमेट और बैंक खाते की जानकारी भी ले ली, और बिना उन्हें बताए खुद ही कई लेन-देन को अंजाम भी दिया। हालांकि यह कोई नई बात नहीं थी कम्पनी अक्सर ही खुद से अपने निवेशकों के लेन-देन किया करती थी। जब भी कंपनी के ग्राहकों द्वारा सवाल किया जाता था तो कंपनी उन्हें किसी न किसी बहाने से गुमराह किया करती थी।

कंपनी अपने ग्राहकों से मोटी फीस भी वसूलती थी। कंपनी के पैकेज में एक दिन, एक सप्ताह से लेकर सालभर के प्लान शामिल रहते थे। जब कंपनी की सेवाओं की समयावधि समाप्त हो जाती थी तब भी वह अपने ग्राहकों को गुमराह करती थी। वहीं नुकसान की स्थिति में कंपनी अपने उपभोक्ताओं से अतिरिक्त रकम भी वसूल करती थी और उन्हें फिर से चूना लगाती थी। निवेशकों को इस तरह से गुमराह किया जाता था कि उन्हें कुछ भी समझ नहीं आता था कि आखिर कैसे उनकी कमाई कंपनी में ही खर्च हो जाती थी।

शेयर एडवाइजरी कंपनी का मालिक धोखाधड़ी के मामले में रिमांड पर

सेबी द्वारा निर्देशित किए जाने पर भी जब कंपनी ने इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की तो फिर सेबी को ही कार्रवाई करनी पड़ी। इसके बाद सेबी ने देर से ही सही पर कार्रवाई कर कंपनी पर तमाम तरह के प्रतिबंध लगा दिए। सेबी द्वारा इस तरह की कार्रवाई पहली बार की गई है जिसमें कंपनी के सिर्फ डायरेक्टर नहीं बल्कि कर्मचारी तक इसके शिकंजे में आ गए हैं।

सीधे तौर पर कम्पनी से जुड़े लोगों को सेबी ने ‘ब्लैकलिस्ट’ कर दिया। इतना ही नहीं सेबी ने कंपनी की सभी तरह की संपत्ति के बेचे जाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया। कंपनी के बैंक खातों से लगभग 105 करोड़ के लेनदेन का हिसाब मिला है। इससे पता चलता है की कंपनी ने कितने बड़े स्तर पर ये फर्जीवाड़ा किया है।

इस सख्त कार्यवाही के लिए सेबी की तारीफ करनी होगी। इन कदम से निश्चित ही एडवाइजरी कंपनियों पर निवेशकों का विश्वास फिर जागेगा। जैसे कहावत है कि, एक मछली पूरे तालाब को गन्दा कर देती है। ठीक उसी ways2capital जैसी चंद लुटेरी कम्पनियों की वजह से ईमानदारी से अपना काम कर रही तमाम कंपनियां भी बदनाम हो जाती है।

ways2capital के कर्ता-धर्ताओं ने धोखाधड़ी के साथ ही ग्राहकों के भरोसे को भी तोड़ा है, इसके लिए उन पर और कठोर कार्यवाही होना चाहिए। ऐसी फ़र्ज़ी कंपनियों से ईमानदार कंपनियों के अलावा इंदौर की साख पर भी बट्टा लगता है। सेबी के ये कदम सराहनीय है और निवेशकों को भी ऐसी कंपनियों से सावधान रहने की जरूरत है।

आगे भी तेज़ होगी सेबी की कार्रवाई

इंदौर में चल रही सैंकड़ों फर्जी एडवायजरी कंपनियों द्वारा लगातार अपने निवेशकों को करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है। ऐसे में अब सेबी इन कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में हैं। इस कार्रवाई को इसलिए भी सबसे बड़ा बताया जा रहा है, क्योंकि इस कार्रवाई में वे ‘टू कैपिटल कंपनी’ के कर्ताधर्ताओं से ना केवल 105 करोड़ की रिकवरी की जाएगी, बल्कि इसके साथ ही कई और लोगों को भी आरोपित बनाया गया है। सेबी द्वारा वे टू कैपिटल कंपनी के डायरेक्टर के साथ ही एक्स डायरेक्टर। प्रमोटर और पूर्व प्रमोटर,शेयर होल्डर सहित पूर्व शेयर होल्डर और कंपनी के वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों को भी आरोपित बनाया गया है।

बीते कई दिनों से इंदौर सहित आसपास चल रही फर्जी एडवायजरी कंपनियों को लेकर ‘सेबी’ को लगतार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद ‘सेबी’ इन कंपनियो के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज़ करेगी। वहीं कंपनी से जुड़े सभी जिम्मेदारों के खिलाफ रिकवरी करने के साथ ही सेबी ने उनकी निजी और कंपनी की संपत्तियों को सीज़ करने के भी निर्देश दिए हैं। इसके लिए बैंको को निर्देश दिए गए हैं, ताकि फर्जी कंपनियों के संचालक और उनसे जुड़े अधिकारी रुपयों का लेनदेन और उपयोग ना कर सकें।

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