दबंगों का खेल, सरकार का निकाल दिया तेल

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ताकत हो तो इस देश में कोई कुछ भी कर सकता है। देश की सरकार को इतना कमजोर समझा जाता है कि, दूसरे देश के आतंकवादी हों या शहर के मामूली गुंडे सभी सरकार को एजेंट समझते है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें कुछ गुंडे प्रवृत्ति के लोगों ने सरकारी जमीन को बड़ी आसानी से हड़प लिया और खेती भी करने लगे।

ग्राम पंचायत धनखेड़ी के ग्राम मुंडला हुसैन में शासकीय तालाब था। जिसका खसरा क्रमांक 59 है, जिसे गिरिराज पिता कृष्ण चंद शर्मा और ओमप्रकाश पिता ब्रजभूषण शर्मा द्वारा, षड्यंत्र कर कई साल पहले ही कब्ज़ा किया गया था। जिस पर अब शर्मा परिवार खेती करता है जो कि गैर कानूनी है। गांव के वर्तमान सरपंच ठाकुर उम्मेद सिंह सोलंकी बताते है कि, कृष्ण चंद शर्मा पूर्व में सरपंच हुआ करते थे और इनके भी खेत थे। पर इन्होंने उस समय 2.873 हेक्टेयर के सरकारी तालाब को पहले समतल किया और उसके बाद फसल की बुवाई कर दी।

सरपंच रहने की वजह से किसी ने आवाज नहीं उठाई और इसी बात का फायदा शर्मा ने फायदा उठाया। शर्मा ने पटवारी को भी अपनी तरफ मिला लिया। उम्मेद सिंह सोलंकी ने कहा, “वर्तमान सरपंच होने के नाते मैंने इन लोगो के खिलाफ 4 अप्रैल 2017 अनुविभागीय अधिकारी सांवेर में, लिखित शिकायत दर्ज करवाई लेकिन कोई कार्रवाई नही हुई। इसके बाद 12 दिसम्बर 2017 को कलेक्टर महोदय जी को भी लिखित आवेदन दिया और सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज की। पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसा लगता है मानो कोई कार्रवाई न करने की या तो कसम खाई है या मामला कुछ और है।

सरकार जहां एक ओर तालाबों को संरक्षित करने के बारे में बात करती है, वहीं दूसरी ओर सरकार के मुलाजिम चंद रुपए के फायदे के लिए इस ओर ध्यान भी नही देते। उस तालाब से पशु-पक्षी पानी पीते थे पर अब गांव में पक्षी मर रहे है, और सरकारी लोग कोई एक्शन ही नही ले रहे। सरपंच के बयान के बाद रिकॉर्ड में खसरा 59 चेक किया गया तो, शासकीय तालाब निकला।

उसके बाद संबंधित पटवारी रवि राजकुमार से बात की, तो उन्होंने पहले तो कहा, वहां कोई तालाब नही है। पर रिकॉर्ड चेक करने वाली बात पर पटवारी ने चुप्पी साध ली। पटवारी ने खुद चेक करने की बात करते हुए बात टाल दी। पर उसके बयान से यह स्पष्ट है कि, या तो पटवारी फील्ड पर नही जाते, या फिर रिकॉर्ड चेक नही करते। क्योंकि यह संभव नही कि इतने बड़े सरकारी तालाब पर कब्ज़ा हो जाए और पटवारी को जानकारी न हो। बिना सांठ-गांठ यह संभव नहीं है।

जब इस मामले में गिरिराज शर्मा से बात की गई तब उन्होंने इन्फॉर्मेशन को गलत ठहराया। वहीं जब सबूत होने की बात बताई तो वे चुप हो गये और अपने परिचितों से फ़ोन लगवा कर मामले को दबाने का पूरा प्रयास किया। सांवेर तहसीलदार आनंद मालवीय से इस बारे में पूछा तो उन्हें कुछ पता ही नही था। समझने के बाद भी उनका व्यवहार कुछ सतर्क सा नही लगा। तहसीलदार साहब इतने गैरजिम्मेदार निकले कि उन्होंने आश्वासन की पुड़िया तक नही थमाई।

– सुमित ओझा

Indore Crime News : इंदौर के जहरीले कारोबारी

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