नेता नहीं अधिकारियों ने बढ़वाए अपने नंबर

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इंदौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक सभा का होना प्रदेश में हुए सबसे बड़े आयोजनों में से एक था| यह वह आयोजन था, जिसके लिए सबसे कम समय में सबसे पुख्ता तैयारियां की गई थी, लेकिन आखिर वे चेहरे कौन हैं, जो इस कार्यक्रम की सफलता के मानक हैं| यह सभा किसी नेता के बस की बात तो नहीं थी, लेकिन चुनाव से पहले इस सरकारी कार्यक्रम का राजनीतिकरण भी जरूरी था| लिहाज़ा प्रदेश के मुखिया शिवराजसिंह ने अपने सबसे विश्वस्त अधिकारियों पर विश्वास जताया|

प्रदेश के मुख्यसचिव के खास माने जाने वाले नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव विवेक अग्रवाल ने इस कार्यक्रम में अपनी मुख्य भूमिका निभाई| पूर्व इंदौर कलेक्टर अग्रवाल इंदौर की तासीर से परिचित थे| लिहाज़ा उन्होंने नेताओं के भरोसे न रहते हुए भीड़ की जिम्मेदारी भी खुद के अधिकारियों को सौंप दी| इसके अलावा वे तमाम सारे अधिकारी, जो केवल सरकार के बीच अपनी गिनती करवाने में पीछे नहीं हटते हैं, वे इस कार्यक्रम के जरिये एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर गए|

बात की जाए यदि पूर्व कलेक्टर और जनसंपर्क आयुक्त पी.नरहरि की तो उन्होंने प्रदेश के सभी जिलों से प्रधानमंत्री को सीधे जोड़ते हुए शिवराज को खुश करने की पूरी कोशिश की| वहीं कलेक्टर निशांत वरवड़े, जो इंदौर की जनता को थोड़ा कम खुश कर पाते हैं, लेकिन अपने सभी वरिष्ठ अधिकारियों और मुख्यमंत्री को उन्होंने इस बार भी खुश कर दिया|

जिस ढंग से पूरे कार्यक्रम में विवेक अग्रवाल ने मोर्चा संभाला था, वह किसी भी प्रबंधक से कम नज़र नहीं आ रहे थे| यह सभा यदि किसी नेता द्वारा आयोजित की जाती तो नेहरू स्टेडियम में 10 हज़ार से ज्यादा की भीड़ नहीं होती, लेकिन प्रशासन के प्रयासों का ही यह नतीजा है कि पहली बार इस मैदान में इतने ज्यादा लोगों को देखा गया |

भारी बारिश के बावजूद प्रधानमंत्री का कार्यक्रम चलता रहा और लोग बैठे रहे तो इसका श्रेय भी प्रशासन को ही जाता है यानी कुल मिलाकर अधिकारियों ने जो काम इंदौर में कर दिया, उसके बाद कम से कम वे महीनेभर कोई काम न भी करें तो सरकार को उनसे कोई शिकवा नहीं होगा|

-पॉलिटिकल डेस्क

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