‘वन कप पोएट्री’ में नए कलाकारों ने सुनाई रचनाएं

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इंदौर में युवा कवियों और शायरों को मंच प्रदान करने के लिए इस रविवार हिन्दी को समर्पित संस्था ‘पोएट्री कॉर्नर ऑफ़ इंडिया’ ने ओपन माइक का आयोजन किया| कार्यक्रम में देवास के वरिष्ठ साहित्यकार संदीप नाईक और इंदौर के प्रसिद्ध शायर धीरज चौहान बतौर मुख्यअतिथि उपस्थित रहे| अतिथियों ने युवाओं को लेखन और उससे जुड़े मुद्दों पर जानकारी दी|

वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिंदुस्तानी और गीतकार अमन अक्षर भी कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य नए कवियों एवं वरिष्ठ साहित्यकारों के साथ ‘हिंदी की समकालीनता पर बात’ करना था। चर्चा के साथ में ही 100 से अधिक प्रविष्ठियों में से चयनित 40 से अधिक कवियों ने अपनी ग़ज़ल, गीत, नज़्मों से समा बांधा| कार्यक्रम का संयोजन अवधेश शर्मा ‘ध्रुव’ और संचालन मयंका दादू द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में अवधेश शर्मा ‘ध्रुव’ ने “लड़ते रहे जिनके पूर्वज जातिवाद के श्राप से, बदल लिया है भगवान उन्होंने सहूलियत के हिसाब से” पढ़कर गत दिनों भारत बंद के दौरान भगवानों की तस्वीर फाड़ने वालों पर तंज कसा। शहर के ही दोहाकार प्रेम सागर ने अपने दोहों से उपस्थित श्रोताओं को बांधा| वहीं हिमांशु मंगला वर्मा ने अपने गीत ‘उर्मिला का दीप हुआ हूं’ से महफ़िल में ख़ूब तालियां बटोरी।

ख़ुशबू मालवीया ने अपनी पंक्तियों ”पेट भरने से ज़्यादा खेत से मिलता नहीं, गांव वरना कौन छोड़े शहर जाने के लिए” और नितेश कुशवाह ने अपनी ग़ज़ल ”आवाज़ों को चीर के निकली ख़ामोशी, हर सू काबिज़ शोर की मारी ख़ामोशी…दो ही चीजें मुझको हद से प्यारी है, इक तो तू है दूजी मेरी ख़ामोशी” से कार्यक्रम को परवान तक पहुंचाया| अन्य कवियों में आकाश साहू, अभिषेक, आला चौहान, दीपक, देवेंद्र, देवव्रत, हर्षा, भावेश, सौरभ, ऋषभ, महेंद्र, खुशी, अंकित, अमितेश, अपूर्व, शिवेंद्र आदि ने भी काव्य पाठ किया|

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