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MP में प्रशासनिक अधिकारियों के भ्रष्टाचार का भंडाफोड़

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देश का हृदय प्रदेश कहे जाने वाला मध्यप्रदेश अब प्रशासन के जिम्मेदारों के कारण ही बदनाम होते जा रहा है। अपनी धरोहरों की गाथा सुनाने वाले प्रदेश से अब भ्रष्टाचारियों (Corrupt ) के काले कारनामों की गूंज सुनाई दे रही है। पीछले कुछ दिनों से अभी तक प्रदेश में कई भ्रष्ट अधिकारियों (Corrupt officer)  के नाम उजागर हुए हैं, जो जनता का पैसा लूटकर अपनी तिजोरी भरते हुए धन कुबेर बन गए। इंदौर से भी एक ऐसे ही धन कुबेर बने सहायक आबकारी आयुक्त आलोक खरे (Assistant Excise Commissioner Alok Khare ) की अरबों की काली कमाई उजागर हुई। वहीं ऐसे ही दूसरे धन धन कुबेर आइएएस विवेक अग्रवाल (IAS Vivek Aggarwal ) का भी भंडाफोड़ हुआ है।

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कई ठिकाने अथाह संपत्ति

इंदौर में पदस्थ आबकारी विभाग (Excise Department ) के सहायक आयुक्त आलोक खरे के कई ठिकानों पर एक साथ छापामार कार्रवाई की गई। अफसर की संपत्ति देखकर छापा मारने गए अधिकारियों की भी आंखे खुली की खुली रह गई। कई बंगले, सैकड़ों एकड़ जमीन, कई किलों सोना चाँदी, महंगी कारें, घर में बेशकीमती साजों-सज्जा का सामान, कार्यालय में 85 हजार की एक कुर्सी और लाखों की टेबल और सबसे बड़ी संपत्ति खरे का 10 लाख का विदेशी कुत्ता। लोकायुक्त के डीएसपी नवीन अवस्थी ने बताया कि खरे के कई फॉर्म हाउस के बारे में भी पता चला है (Alok Kumar Khare Indore Lokayukta Raid)। जहां पाँच सितारा होटल जैसी सुविधाएं और करोड़ों का सामान हैं। चौपड़ा वाले लक्जरी फार्म हाउस पर ताइबानी अमरूद के 3600 पौधे और 1850 संतरे के पौधे लगे हैं।  फार्म हाउस से एक करोड़ की वार्षिक आय होने की जानकारी भी आयकर विभाग को मिली है। उसके एक एक फॉर्म हाउस और बंगले पर 7-8 कर्मचारी हैं। उसके पास तीन से अधिक फॉर्म हाउस हैं। फिलहाल आरोपी अधिकारी से अभी भी पुछताछ की जा रही है।

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आबकारी विभाग के सहायक आयुक्त आलोक खरे (Alok Kumar Khare Indore Lokayukta Raid) के जैसे ही प्रदेश में आइएएस विवेक अग्रवाल पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। सीनियर आईएएस अफसर विवेक अग्रवाल और बेटे वैभव अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने नगरीय प्रशासन के प्रमुख सचिव रहते हुए एचपीई कंपनी को 300 करोड़ रुपए का टेंडर दिया था। जबकि बीएसएनएल ने 250 करोड़ का टेंडर दिया था। इसके बाद भी टेंडर एचपीई कंपनी को टेंडर दिया गया था, जबकि कंपनी को इस काम का बिल्कुल भी अनुभव नहीं था। फिर भी मोती रकम लेने के बाद ये टेंडर दे दिया गया।

आलोक खरे और विवेक अग्रवाल के जैसे ऐसे कई भ्रष्टाचारी असफरों के काले धन का खुलासा हो चुका है। जांच के नाम पर खूब हल्ला किया जाता है, संपत्ति सीज की जाती है, लेकिन कुछ समय बाद सब कुछ सामान्य हो जाता है (Indore Lokayukta Raid)। कई मामलों में तो जनता के खून पसीने की कमाई से धन कुबेर बने भ्रष्टाचारी अधिकारियों को संपत्ति भी लौटा दी जाती है।

आतंकियों से एनसीपी नेताओं के संबंध

    – Ranjita Pathare 

 

 

 

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