पढ़िए, आखिर इंदौर में कौन बन रहा है विधायक

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प्रदेश में विधानसभा चुनाव में किसकी सरकार बन रही है, यह तो राष्ट्रीय एजेंसियों के एक्जिट पोल ने स्पष्ट कर दिया है। कहीं ना कहीं इन एक्जिट पोल के नतीजे आने के बाद अब सियासी हलकों में चिंता और चिंतन का दौर भी चल पड़ा है। कौन इस बार सत्ता में काबिज होगा और कौन बनेगा सूबे का मुख्यमंत्री इसे लेकर जोड़तोड़ हो रहे हैं, लेकिन इसी बीच चर्चा मालवा के सबसे बड़े शहर इंदौर की भी है, जहां की सीटों को लेकर सभी दूर चर्चाओं का बाज़ार गरम है। ऐसे में कौन बन रहा है इंदौर से विधायक इस बात की पड़ताल की टीम टैलेंटेड इंडिया ने…

तो क्या कहता है इंदौर का एक्जिट पोल ये आपको बताते हैं। सबसे पहले ये बताते हैं कि इंदौर में किस दल को कितनी सीटें आ सकती हैं। वोटरों और इंदौर शहर के नागरिकों की मानें तो इंदौर में इस बार काफी ज्यादा टक्कर देखने को मिलेगी। यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच अनुपात 5 और 4 का रहेगा, यानि 5 सीटें भाजपा को और 4 सीटें कांग्रेस को मिलेंगी। वहीं कुछ वोटरों का अनुमान यह भी है कि इंदौर की शहरी सीटों में से भी 1 सीट कांग्रेस को मिल सकती है, यानि इस बार कांग्रेस 5 और भाजपा 4 सीटों पर आएगी। अंतर फिर भी वहीं है 5 अनुपात 4।

विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 1-

सबसे पहले बात करते हैं इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 01 की। इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा जिस वर्ग के वोट हैं उनमें ब्राह्मण, वैश्य वर्ग, और यादव समाज की बहुलता है। ऐसे में इस क्षेत्र से बीते तीन कार्यकाल से विधायक सुदर्शन गुप्ता की जीत का कारण भी कहीं ना कहीं ये रहा कि यहां से उन्हें वैश्य और ब्राह्मण वर्ग का अच्छा सहयोग मिला। वहीं इस क्षेत्र में कांग्रेस में सबसे ज्यादा सेंधमारी बीते चुनावों में होती आई है जिसका फायदा भाजपा को मिलता था। इस बार चुनाव में बाज़ी पलटी है। सुदर्शन गुप्ता अपने ही बयानों के कारण निशाने पर रहे। संजय शुक्ला ने कांग्रेस के नेताओं को मनाने की कोशिश की। जिसके चलते इस बार कांग्रेस में इस क्षेत्र में जीत की उम्मीद बढ़ी है। यदि बात की जाए, तो इस क्षेत्र से संजय शुक्ला को फिलहाल 46 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया है, जबकि सुदर्शन गुप्ता को 41 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया है। 6 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिन्हें लगता है कि यहां से अन्य दल को भी जीतना चाहिए। जबकि 7 प्रतिशत लोगों को दोनों ही नेता पसंद नहीं है।

विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 2-

अब बात करते हैं इंदौर के क्षेत्र क्रमांक 2 की। यहां से बीते चुनाव में रमेश मेंदोला ने 90 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी। रमेश मेंदोलो की लोकप्रियता अभी भी जस की तस ही है, लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस ने भी बराबरी से ताकत लगाई। जनता का मन यदि पढ़ा जाए तो यहां से रमेश मेंदोला को अभी भी 58 प्रतिशत लोग विधायक के रुप में देखना चाहते हैं। जबकि 40 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिन्हें लगता है कि इस बार कांग्रेस को क्षेत्र में आना चाहिए। यहां तीसरे उम्मीदवार की संभावनाओं को लोगों ने सीरे से खारिज किया है, लेकिन 2 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिन्होंने सवालों के जवाब देने या अपनी राय रखने से मना कर दिया। यानि कुछ लोग क्षेत्र क्रमांक 2 से कुछ चाहते तो हैं, लेकिन बताना नहीं चाहते।

विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 3-

इंदौर शहर की सबसे छोटी विधानसभा होने के चलते यहां मुकाबला छोटा और सबसे तगड़ा है। तीन बार के कांगे्रस से विधायक अश्विन जोशी का मुकाबला भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय से है। ऐसे में यहां कांटे की टक्कर बताई जा रही है। सबसे पहले प्रतिशत की बात करते हैं। यहां 49 प्रतिशत लोग अश्विन जोशी को विधायक के तौर पर देखना पसंद करते हैं। इसका कारण यह भी है कि जोशी जब तीन बार के विधायक रहे तो उन्होंने निजी तौर पर अपनी पहचान कायम की, जबकि आकाश विजयवर्गीय ने यही पहचान अपने पिता के क्षेत्र महू में कायम की थी। वहीं क्षेत्र में मुस्लिम बूथ पर कांग्रेस का मैनेजमेंट तगड़ा रहा। जिसके चलते वोटिंग प्रतिशत बढ़ा। ये वोट भी जोशी के पक्ष में जा सकते हैं।

लोगों का यह भी मानना है कि आकाश विजयवर्गीय युवा हैं और वे अपने पिता की तरह ही कार्य भी कर सकते हैं। इसके लिए उन्होंने आकाश को पसंद किया है, ऐसे लोगों की संख्या 48 प्रतिशत है। जबकि 3 प्रतिशत लोग यहां भी हैं जिनका मानना है कि वे अपने पत्ते नहीं खोलेंगे। यानि सियासी मामलों में राय नहीं देंगे।

विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 4-

क्षेत्र क्रमांक 4 में सीधा मुकाबला महापौर मालिनी और सुरजीत सिंह चड्ढा के बीच था। यहां मालिनी गौड़ को लोगों ने फिर से पसंद किया है। अभी भी 55 प्रतिशत लोग मालिनी गौड़ को विधायक बनाने की चाह रखते हैं। जबकि 35 प्रतिशत लोग ही कांग्रेस के पक्ष में है। 6 प्रतिशत लोगों का मानना है कि यहां से अन्य उम्मीदवार जो कि दूसरे मुद्दों को लेकर लड़े उन्हें भी वोट दिया जाना चाहिए। जबकि 4 प्रतिशत ने किसी को भी पसंद नहीं किया।

विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 5-

यहां भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही जो उम्मीदवार उतारे थे, उनकी छवि बिल्कुल एक समान थी। तीन बार के विधायक महेंद्र हार्डिया का मुकाबला पूर्व विधायक सत्यनारायण पटेल से था। सत्यनारायण पटेल ने यहां मुस्लिम और खाती समाज के वोटों में अच्छी खासी सेंधमारी की है। इस विधानसभा में कांगे्रस भाजपा में मुकाबला भी 50 50 का है। यानि यहां जितने लोगांे ने महेंद्र हार्डिया को पसंद किया है, उतने ही लोग चाहते हैं कि सत्यनारायण पटेल को भी वे आजमाए। यानि यहां दोनों ही नेताओं को 47 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया है। 6 प्रतिशत लोगांे ने अपनी राय जाहिर नहीं की है।

विधानसभा सांवेर-

इस विधानसभा से पूर्व विधायक तुलसी सिलावट को कांग्रेस ने इस बार टिकट दिया था, जबकि वर्तमान विधायक राजेश सोनकर को जनता के विरोध का सामना चुनाव में भी करना पड़ा। यहां से तुलसी सिलावट के नाम की हवा भी तेजी से बही, तो अभी भी चल रही है। तुलसी सिलावट को सांवेर की 54 प्रतिशत जनता ने पसंद किया है, जबकि राजेश सोनकर को 42 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया है। जबकि 4 प्रतिशत लोगांे का मानना है कि दोनों ही नेता उनके क्षेत्र का विकास नहीं कर सकते।

विधानसभा महू-

महू से पूर्व विधायक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अंतरसिंह दरबार का मुकाबला भाजपा विधायक उषा ठाकुर से था। यहां उषा ठाकुर को बाहरी होने के आरोपों का भी सामना करना पड़ा और भाजपा के कुछ नेताओं ने भी उनके खिलाफ असहयोग आंदोलन चलाया था। इसके चलते उन्हें यहां भारी नुकसान होता नज़र आ रहा है। यहां से कांग्रेस के अंतरसिंह दरबार को 56 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया है, जबकि 43 प्रतिशत लोग उषा ठाकुर को चाहते है। मात्र 1 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिन्होंने किसी को पसंद नहीं किया।

विधानसभा राऊ-

इंदौर की सबसे चर्चित सीट राऊ को लेकर भी इस बार टक्कर कड़ी होती नज़र आ रही है। यहां से विधायक जीतू पटवारी के सामने भाजपा ने वरिष्ठ नेता मधु वर्मा को उतारा था। मधु वर्मा ने जीतू पटवारी के कई काटे भी है। उन्होंनें मराठी वोटों ने सेंध मारी है, इसके अलावा सिरपुर और बांक जैसे कई इलाके जो कि मुस्लिम बाहुल इलाके हैं उनमें कम वोट गिरना भी कांग्रेस के लिए चिंता का कारण है। यहां से जीत तो मतदाताओं ने तय कर दी है, लेकिन अंतर बहुत ही कम है। यानि जो भी जीतेगा वह महज 10 हजार से भी कम अंतर से जीतेगा। यहां से भाजपा के मधु वर्मा को 49 प्रतिशत लोगांे ने पसंद किया है, जबकि जीतू पटवारी को 50 प्रतिशत लोगांे ने पसंद किया है। 1 प्रतिशत लोगांे ने किसी को भी पसंद नहीं किया है।

विधानसभा देपालपुर-

इंदौर की देपालपुर विधानसभा के विधायक पर 5 सालांे से ही अपने क्षेत्र में सक्रीय नहीं होने के आरोप लगे थे। देपालपुर में कांग्रेस की ओर से विशाल पटेल ने चुनाव लड़ा था, जबकि भाजपा ने विधायक मनोज पटेल को ही टिकट दिया था। इस चुनाव में कांग्रेस ने कई वोट भी देपालपुर में अपने बढ़ाए हैं। जैसे कि राजपूत और गारी समाज तो कि पांरपरिक रुप से ज्यादा भाजपा की ओर था, उन्होंने भी इस बार कांग्रेस में अपनी रुची दिखाई है। ऐसे ही कलोता समाज के और मुस्लिम समाज के एक तरफा वोट कांग्रेस के पक्ष में गिरे हैं। यहां से इंदौर में कांग्रेस की बड़ी जीत का अनुमान लगाया जा रहा है। यदि जनता का मन हम जानें तो देपालपुर में विशाल पटेल को 57 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया हैं। जबकि 35 प्रतिशत लोग मनोज पटेल को जीताना चाहते हैं। जबकि 8 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिनका कहना था कि उनका मत वे 11दिसंबर को ही जाहिर करेंगे।

तो ये थी मैदानी रिपोर्ट जिसे टैलेंटेड इंडिया ने जाना। ये जनता का अनुमान है, लेकिन अंततः परिणाम तो ईवीएम की गिनती के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।

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