‘मालवा उत्सव’ में नज़र आई बदइंतज़ामी

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मालवा की शान कहे जाने वाले इंदौर के गरिमामय आयोजन ‘मालवा उत्सव’ की शुरुआत हो चुकी है| लोक संस्कृति मंच द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किए जाने वाले इस ‘मालवा उत्सव’ (Malwa Utsav Celebration 2019) में हर साल शहर के लाखों लोग पहुंचते हैं। इस वर्ष 9 जून से कार्यक्रम की शुरुआत की गई। आयोजन के पहले दिन हर वर्ष की तरह शहर के कई क्षेत्रों से लोग यहां पहुंचे, लेकिन निराश लौटे  क्योंकि इस बार मेले में काफी बदइंतजामी नज़र आईं|

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उल्लेखनीय है कि कई राज्यों के लोक कलाकारों का नृत्य और शिल्प मेले में देश-दुनिया के शिल्पकारों की कलाकृतियां देखने बड़ी तादाद में लोग लालबाग में होने वाले इस उत्सव में आते हैं। मालवा उत्सव (Malwa Utsav Celebration 2019) के पहले दिन जो रौनक इस शहर ने देखी है, वह नदारद थी। लोक संस्कृति मंच ने घोषित किया था कि 9 जून से शिल्प मेला शुरू हो जाएगा इसलिए लोग भर दोपहर में भी लालबाग पहुंच गए, लेकिन मेले के नाम पर सिर्फ एक दुकान खुली। बाकी कई दुकानें तो लगी ही नहीं। जो लगी उनमें में माल अभी बोरों में बंद है। लिहाज़ा खरीदारों को लौटना पड़ा। और यह सब तब है जब लोक संस्कृ़ति मंच के अध्यक्ष और इस उत्सव के कर्ता-धर्ता शंकर लालवानी सांसद बन चुके हैं।

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उम्मीद तो थी कि मालवा उत्सव इस बार और भव्य होगा, लेकिन उत्सव के 20 साल के इतिहास में ये सबसे फीकी शुरुआत रही। पिछले 20 साल से होते आ रहे इस उत्सव में ऐसा भी पहली बार हुआ है कि नृत्य प्रस्तुतियां दूसरे दिन से करवाई जाएंगी। पहले दिन कोई नृत्य प्रस्तुति नहीं हुई।  शाम 6 बजे तक भी एक-दो दुकानें ही सजी थीं। 20 साल में पहली बार (Malwa Utsav Celebration 2019) नृत्य भी अगले दिन यानी सोमवार से करवाए जाएंगे।

आयोजकों का कहना है कि तारीख देर से तय हुई, जिस वजह से उत्सव आज उस तरह शुरू नहीं हो पाया, जैसा होना चाहिए था। सोमवार से उत्सव (Malwa Utsav Celebration 2019) यथावत होगा। समारोह से जुड़े नितिन तापड़िया का कहना है कि तारीख देर से तय हुई इसलिए शिल्प मेले में अधिकतर दुकानों की बुकिंग अभी हो नहीं पाई है।

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सांसद और लोक संस्कृति मंच के संयोजक शंकर लालवानी का कहना है कि इस बार आचार संहिता के कारण तारीख देरी से तय हो सकी। शिल्प मेला क्यों नहीं लगा मैं पता लगाता हूं, मैं इंदौर में नहीं हूं। इस बार पार्लियामेंट सेशन 6-7 जून को होना था। इसे 16 तक बढ़ा दिया गया। मालवा उत्सव जो इस सत्र के बाद होना था वो हमें प्रीपोंड करना पड़ा। इस वजह से कुछ गड़बड़ी हो गई। उत्सव (malwa utsav) आज से शुरू नहीं हुआ है तो कल से व्यवस्थित हो जाएगा। शिल्प मेला आज से नहीं लगा है तो कल से लग जाएगा। बाहर से जो शिल्पकार आते हैं उनका कहना है कि हमें सेटअप जमाने के लिए एक दिन चाहिए।

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