कुछ बुद्धिहीन लोगों की वजह से इंदौर का नाम हुआ शर्मसार

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इंदौर, देश का सबसे स्वच्छतम (Cleanest city Indore) , सबसे जिंदादिल और सबसे अच्छा शहर (Indore Is Ashamed)। सबसे जिम्मेदार और समझदार लोगों का शहर। हर बार अपनी समझदारी और जागरूकता से पूरे देश का दिल जीतने वाले लोगों ने रविवार 22 मार्च को इंदौर शहर को देश के सामने शर्मिंदा कर दिया। पीएम मोदी (PM Modi)  की अपील पर सुबह 7 बजे से इंदौर शहर के हर एक बाशिंदे ने जनता कर्फ्यू की मुहीम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इंदौर शहर ने कोरोना वायरस (COVID 19) को हारने और इस मुश्किल घड़ी में एक जुट रहने का संदेश दिया। फिर आया समय उन तमाम लोगों के सम्मान का जो अपनी जान जोखिम में डालकर कोरोना जैसे खतरनाक वायरस (Coronavirus India) से संक्रमित लोगों का इलाज कर रहे हैं। घड़ी की सुई ने जैसे ही 5 बजाए पूरे शहर में जश्न का माहौल बन गया। हर व्यक्ति अपने घर की छतों पर, बालकनी में, दरवाजे पर खड़े हो कर ताली, थाली, घंटी, ढोल और यहां तक की पटाखे फोड़े। ये इस बात की ख़ुशी नहीं थी कि लोग दिनभर से घर में थे और कर्फ्यू का पालन किया था, बल्कि ये सलाम था उनके लिए जो कोरोना से पीडित लोगों का इलाज कर रहे हैं। हालांकि कर्फ्यू अभी ख़त्म नहीं हुआ था और लोगों को रात 9 बजे तक इसका पालन करना था। कुछ शरारती तत्वों ने इसका भी मजाक बना दिया और निकल पड़े रजवाड़ा पर जश्न मनाने जैसे कोई बड़ी जंग जीत ली हो। हालांकि ये कुछ लोग ही थे जिन्होने न सिर्फ आदेश का उल्लंघन किया, बल्कि शहर का नाम भी मिटटी में मिला दिया। वो कहावत है कि एक मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है, वो सही साबित हुई। सोशल मीडिया पर लोग शहर की आलोचना कर रहे हैं, इंदौरवासियों की समझदारी को ताना दे रहे हैं। ऐसा ही मामला गुजरात के अहमदाबाद में सामने आया तो वहां की सरकार ने कानून तोड़ने वालों की पहचान कर 40 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली, लेकिन इंदौर का क्या?

Coronavirus को लेकर पीएम मोदी का देश के नाम संदेश

देर सबेर ही सही इंदौर (Coronavirus Indore) के प्रशासन की भी आंखे खुली और उसे शर्मिंदगी महसूस हुई तो इंदौर के कलेक्टर लोकेश जाटव ने तत्काल ही अधिकारियों को जनता कर्फ्यू का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के आदेश जारी कर दिए। लेकिन इंदौर शहर के नाम पर धब्बा लग गया कि आखिर क्या अंतर है पढ़ी लिखी और समझदार कहलाने वाली लापरवाह कनिका कपूर में और स्वच्छ शहर के जिम्मेदार और जागरूक कहलाने वाले नागरिकों में? अगर इस लापरवाही या यूं कहें कि जानबूझकर की गई गलती से किसी की जान चली गई तो क्या ऐसा करने वाले खुद को माफ़ कर पाएंगे? जिनके लिए सभी ने तालियां बजाईं और उनका हौसला बढाया, वे दिन रात अपनी जान जोखिम में डालकर चौबीसों घंटे लगातार सेवा में लगे हैं और अपने दायित्व को निभा रहे हैं ताकि सभी स्वस्थ रहें और इस वायरस (Coronavirus Pandemic) को दूर भगा सकें। सरकार, सामजिक कार्यकर्ता, बड़े-बड़े संगठन, नेता, प्रशासन, डॉक्टर्स सभी लोगों से अपील कर रहे हैं घरों में रहने की, सोशल डिस्टेंस की, सावधानी बरतने की और भीड़ से दूर रहने की, लेकिन ये इंदौर के लोगों को क्या हो गया है कि उन्हें ये बात समझ ही नहीं आ रही है। इन्दोरियों की समझदारी जैसे ख़त्म हो गई है।

इस दवा से ख़त्म होगा Coronavirus!

किसी को ये नहीं समझ आ रहा कि (Indore Is Ashamed) उनकी एक छोटी सी भूल, वास्तव में भूल नहीं बहुत बड़ी लापरवाही है। बेशक लोग भय से निर्भय हो जाएं कोई बात नहीं, इस तनाव के माहौल को हर्ष में तब्दील कर दें कोई समस्या नहीं लेकिन किसी को भी ये हक़ नहीं है कि वह अपने फालतू के शौक और मस्ती की वजह से सैकड़ों लोगों की जान दांव पर लगा दे। लॉकडाउन में अगर सभी थोड़ी समझदारी दिखाएंगे तो यकीन मानिए सभी इस समस्या से बेहद जल्द निपट लेंगे। लेकिन अगर सभी यही रवैया रखेंगे तो मजबूरन सरकार को कड़ा कदम उठाना पड़ेगा और दूसरे देशों की तरह देश में कर्फ्यू लगाना पड़ेगा। कर्फ्यू मतलब सब बंद। लॉकडाउन (Indore Lock Down) में जरूरी चीज़े उपलब्ध रहेंगी लेकिन यदि एक बार कर्फ्यू लग गया तो घर से बाहर निकलने पर जुर्माना लगेगा। इतनी सी बात इंदौर के लोग क्यों नहीं समझ रहे कि ये सब उनकी ही सुरक्षा के लिए किया जा रहा है। पूरे विश्व में हजारों कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम लेकर 14 से लेकर 20 घंटे की निरंतर ड्यूटी दे रहे हैं। इनमें पुलिस, मीडिया साथी, फोटोग्राफर, वीडियोग्राफर, पत्रकार, डॉक्टर, सेना,सफाईकर्मी, जनसेवक कई लोग शामिल हैं। टैलेंटेड इंडिया परिवार सभी इंदौरवासियों से आग्रह करता है कि चंद बुद्धिहीनों की वजह है ‘पूरे शहर’ की पहचान ना बिगड़े इस बात का ख्याल जरूर रखें, और कानूनी आदेशों का पालन कर सच्चे इंदौरी का परिचय दें।

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Prabhat Jain

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